Sunday, November 9, 2014

FUN-MAZA-MASTI पापा प्लीज........4

FUN-MAZA-MASTI

 पापा प्लीज........4


करीब दो घंटे के बाद कालिया एक स्थान पर रूका और उस ड्राइवर से फोन से किसी को फोन किया...कालिया किससे बात किया वो तो मालूम नहीं चल रहा था लड़की को पर क्या बात कर रहा था वो अच्छी तरह समझ रही थी....

वो किसी पुराने दोस्त को फोन किया था और पहले तो हाल-चाल सुनाया और सुना...फिर वो अपनी स्थिति बताते हुए कोई सुरक्षित जगह की व्यवस्था करने कहा जहाँ वो लड़की को रख सके...

कुछ ही देर में बात खत्म कर कालिया ड्राइवर को किसी नदी किनारे चलने कहा...ड्राइवर भी थोड़ा हिचका क्योंकि नदी किनारे वो अच्छी तरह जानता था इस तरफ तो कुछ भी नहीं है और है भी तो नदी से एक किमी पहले ही तक सारे गांव है...

और नदी के उस पार सिर्फ घने जंगल है जहां कोई जाता वाता नहीं है और ना ही नदी पार करने का कोई साधन है...पर वो बिना कोई सवाल किए चल पड़ा...

अपने दोस्त के बताए रास्ते को कालिया ड्राइवर से कह दिया कि किस होकर चलना है ताकि रास्ते में कोई गांव ना पड़े और ना कोई देखे...आधे घंटे में सही सलामत वो नदी तट पर पहुँच गया था...

कालिया उस ड्राइवर को समझा दिया कि अब वो चुपचाप मुझे भूल कर अपने काम में लग जाना है...और कभी पुलिस उस तक पहुँच भी गई तो बस मेन रोड पर उतारने की बात कह देना जहां से हम मेन रोड छोड़े थे..

ड्राइवर उसकी बात सुना तो जरूर पर उसका ध्यान सिर्फ इसी बात पर अटका था कि अब ये जाएंगे कहाँ और रहेंगे कहाँ? इधर तो कोई आदमी भी नहीं दिख रहा है और इतनी चौड़ी नदी में भी कोई नजर नहीं आ रहा तो ये जाएगा कहाँ...

कालिया,"ऐ लड़की , तैरना आता है?"

लड़की पहले तो मुंह बना कभी नदी की तरफ तो कभी कालिया की तरफ देखने लगी..फिर बोली,"पागल हो क्या? इतनी बड़ी नदी तैर कर पार करोगे...आधे भी नहीं जा पाओगे...और मैं तो इधर ही गटक हो जाउंगी...नई नई सिखी हूँ...मुझे नहीं मरना..."

लड़की की बात से कालिया मुस्कुरा पड़ा और बोला,"चलो अच्छा है...भागने की सोचोगी भी नहीं अगर सच में नई नई तैरना सिखी हो तो..." उसकी बात से लड़की थोड़ी मायूस हो गई कि अगर सच में उस तरफ गई तो भागना तो नामुमकिन है...बस पापा ही कुछ कर सकते हैं...

कोई पांच मिनट बाद नदी के बीचों बीच कुछ नजर आई तो ड्राइवर आँखें फाड़े उसे देखने लगा...उस घने जंगल की तरफ से एक बोट...अजीब है..वो ऐसा जंगल है जहाँ आज तक कोई गया नहीं है...ना लोकल लोग और ना सरकार की तरफ से...

कुछ ही देर में वो छोटी सी बोट किनारे पर आ पहुँची और उसमें से बिल्कुल खतरनाक टाइप का डाकू जैसा दिखने वाला आदमी कालिया की तरफ हंसते हुए हाय बोला....कालिया भी हंस के हाय बोला और लड़की को चलने बोला...

लड़की मुकुर रही थी उधर जाने से...तभी कालिया आगे बढ़ा और लड़की की बाजू एक हाथ से जकड़ा और दूसरा हाथ लड़की की चूतड़ पर लगा झटके से कंधे पर उठा लिया और ड्राइवर को बाय बोल बोट की तरफ चल दिया...

लड़की कालिया की पीठ पर लगातार घूंसे बरसा रही थी और पैर चला रही था पर कालिया को ये सब बस एक छुअन महसूस हो रही थी...कुछ ही पल में बोट नदी में कुछ दूर तक निकल गई थी तो लड़की शांत हो गई और रोने लगी...अब कुछ चाह कर भी नहीं कर सकती थी...

तो कालिया उसे नीचे उतार दिया...लड़की नीचे उतरते ही धम्म से बैठ गई और बस रोए जा रही थी...कालिया को उसका रोना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था...वो भी उसी के पास बैठ गया...

कालिया,"हाँ तो रत्ना भाई, और सब कैसा चल रहा है?" ये कालिया का बचपन का साथी था जो आज से दस साल पहले एक मर्डर करके भागा था तो आज तक गायब ही था...उसके बाद तो वो मुजरिम की दुनिया का बेताज बादशाह था...पर हाँ जहाँ कालिया मर्डर करने से हिचकता था वहीं ये रत्ना डाकू निर्दोष को मर्डर करने से डरता था...

सुपारी पर काम करवाता था पर वजह जानने के बाद...इससे उसे एक बात का काफी फायदा हुआ...कहीं भी गलत काम कोई बदमाश ही करता था तो कोई ना कोई उसके नाम का सुपारी दे डालता था और रत्ना उसका काम तमाम भी कर देता था...

मतलब दूसरा बादशाह बनने से पहले खत्म और पुलिस को भी इस नई परेशानी से निजात...पुलिस भी जानती थी कि ये काम फरार रत्ना का है पर वो भी केस दर्ज कर उसे दो चार इधर उधर घूम फिर कर खोजने की कोशिश करता और फिर बैठ जाता....

बैठने की वजह सिर्फ ये थी कि रत्ना किधर रहता ये मालूम ही नहीं चलती...और साथ में पुलिस का काम भी हल्का हो जाता था...और पैसे का इंतजाम रत्ना डाकू बड़े बड़े कारोबारी,नेता जैसे लोगों से करता था जिनका ब्लैक मनी एक समंदर की तरह हो...

इसके लिए वो अपहरण कर लेता था उसके फैमिली मेंबर को...मतलब साफ सुथरी छवि में खतरनाक डाकू...शब्दों का ताल मेल बड़ी अजीब है यहाँ पर पर सच्चाई तो यही है...

रत्ना,"एकदम झक्कास है दोस्त...बस तुम्हारी याद कभी कभी नींद खराब कर देती थी तो आज से वो भी खत्म..." और फिर रत्ना कहते हुए हँस पड़ा जिसके साथ कालिया भी हँस पड़ा...

रत्ना,"अच्छा यार, ये तो बता ये कौन है और इसे क्यों उठाया..पता है तुम जैसे ही बोला ना कि लड़की उठा लिया तो मैं तो सदमे में जाते जाते रह गया...शाला ये सिर्फ पॉकेटमारी तक रहने वाला दोस्त किडनैप का कैसे कर लिया..."


रत्ना की बात सुनते ही कालिया जोर से हँस पड़ा और हंसते हुए बोला,"यार जब मुसीबत आती है ना तो सब कुछ करने की हिम्मत आ जाती है...और मेरी मुसीबत तब आई जब इसका सूटकेस गायब किया..."

"मतलब...."रत्ना आश्चर्य से कालिया की तरफ देखने लगा...बोट अपनी गति से हिचकोले खाती बढ़ रही थी...

"मतलब ये एस.पी. की बेटी है और मुझे मालूम नहीं था...ये नई नई आई है शहर में..बस इसका बाप तब से..."कालिया इतना ही बोल सका कि लड़की सामने से चिल्ला पड़ी...

"ऐ...तुम्हें समझ नहीं आती है...मेरे पापा हैं...बार बार पता नहीं बेशर्मों की तरह...." लड़की अब रोना बंद कर दी थी...अब रोने से भी क्या फायदा? बस स्थिति को संतुलन कर उसकी रंग में रंग जानी थी ताकि प्रेशर की बजाए कुछ सटीक तरीके मिल जाए मुसीबत से निकलने की...

उसकी बात सुनते ही कालिया और रत्ना दोनों की हंसी निकल पड़ी...कालिया तो कुछ वाकिफ हो ही गया था पर रत्ना के लिए ये बड़ी अजीब लड़की दिखी...वो भी कायल हो गया इसकी हिम्मत से...

"यार ये तो तीखी मिर्ची है..."रत्ना उसकी तरफ देखते हुए बड़े ही प्यार से बोला...जिससे लड़की तुनक के मुंह फेरती पानी की तरफ निहारने लगी...

कालिया,"हाँ यार, इसके तेवर जितने तेज हैं उतनी ही खूबसूरती भी...कसम से...बड़े बड़े सुंदर बाल..,बड़ी बड़ी आँखें,सुराही के माफिक गर्दन, पतली कमर, सुडौल और बड़ी बड़ी छातीईई..ई..ई..ई..ई..."

कालिया के मुख से अंतिम शब्द निकलते ही वो किकिया सा गया...क्योंकि ये शब्द सुनते ही लड़की आंख पीली करती उसकी तरफ देखने लगी...एक पल तो रत्ना भी चौंक गया पर तुरंत ही वो ठहाके लगाने लगा...

जिससे कालिया किसी बच्चे की तरह कान पकड़ दांतों तले जीभ दबा माफी मांगते मुस्कुराने लगा...ये देख लड़की की भी हंसी निकल आती पर किसी तरह उसे अंदर ही रख दी पर अपनी नजरें दूसरी तरफ कर हल्की मुस्कान जरूर बिखेड़ दी...

उसके सामने आज पहली बार किसी ने उसकी तारीफ जो की थी...और तारीफ किसे नहीं अच्छी लगती...तारीफ सुन वो अपने दिल की खुशी रोक नहीं पाई और क्षण भर के लिए वो भूल गई कि वो किडनैप भी हुई है...

उधर कालिया भी ये देख काफी काफी खुश हुआ और उसका दिल तो बल्लियों उछलने लगा...वो रत्ना की तरफ देख कर मुस्कुराया और बोला,"यार बच गया नहीं तो..."

उसके बाद कालिया और रत्ना ने अपने बीते हुए दिनों की बात खोल दिया और बात करने लगा...कैसे वो बचपन से ही ऊटपटांग काम करता था...

कैसे मौलवी साहब की मुर्गी चुराकर पार्टी करता था और अगले दिन मौलवी साहब मुर्गी की टांगे लिए पूरे शहर ढ़िढ़ोरा पिटते कहते थे कमीना कालिया और रत्ना मेरी मेहबूबा का ये हाल कर दिया...अब अंडे कैसे खाऊंगा...

इसी तरह की बात करते करते वो किनारे तक पहुँच गया...लड़की पलट कर नदी के उस पार देखी तो पूरा जल ही जल...वो माथा पीट कर रह गई...वो दोनों भी नीचे उतरे और चल पड़े...

कुछ ही दूर झाड़ी की ओट में एक जीप खड़ी थी...रत्ना उस पर सवार हो गया...साथ ही कालिया लड़की को बैठने का इशारा कर रत्ना के बगल में बैठ गया...लड़की के बैठते ही जीप अपनी रफ्तार से जंगलों के बीचोंबीच दौड़ने लगी...

इस दौरान किसी ने कुछ बात नहीं की...करीब एक घंटे जीप पर रहने के बाद जीप एक जगह रूकी...जीप के रूकते ही चार लोग सशस्त्र पता नहीं किधर से आए और जीप के चारों तरफ खड़े हो गए...

रत्ना,"जाओ तुम लोग, ये मेहमान हैं मेरे..." रत्ना के कहते ही पलक झपकते वे सब गायब हो गए...फिर आगे बढ़ झाड़ी को हटा एक सुरंग टाइप के रास्ते से अंदर की तरफ बढ़ गया...

उसके पीछे कालिया ने लड़की को चलने कहा और खुद सबसे पीछे हो लिया...कुछ ही पलों में वो झाड़ी से बाहर निकला तो सामने देख लड़की की आँखें फटी की फटी रह गई...




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