Tuesday, April 22, 2014

FUN-MAZA-MASTI मामी की गदराई गांड-3

FUN-MAZA-MASTI

 मामी की गदराई गांड-3
 मामी के साड़ी के निचे से अब मैं उनके जांघ सहलाने लगा. उनके जांघ मानो मैदे के गोले थे.. बहोत ही मुलायम, और मोटे मोटे.. मामीभी अब पुरे रंग मैं आई थी..
वो अपनी साड़ी उतारने लगी थी, मैंने उन्हें मना किया..
"ठहरो ठहरो मामीजी, अब इतने साल इंतज़ार किया है, तो आराम से मुझे आपके इस गदराये बदन का मजा लेने दो.."
"क्या क्या करोगे मेरे साथ वो तो बताओ"
"बताने की क्या जरुरत है, करके ही दिखता हूँ ना मामीजी, लेकिन पहले ये बताइए, मामा के बाद मुझसे ही चुदने जा रही हो, या किसी और को भी आपने इस गदराये हुए बदन का मजा चखवाया है?"
मामी शरमाके हुयी बोली, "चल हट, बदमाश!!"
"अब इसमें शर्माने वाली क्या बात है? बताइए ना, किसी और के साथ भी मजा लिया है आपने ऐसा लग रहा है मुझे.. सच है ना?"
"हाँ"
"किसने मजा उठाया है इस जन्नत जैसे बदन का? मैं जानता हूँ क्या उसे? सारी बाते बताओना, मजा आएगा सुनके.. और आप एकदम से "पतिव्रता" औरत से "लंडव्रता" कैसे बन गयी? मुझे तो समझ नहीं आ रहा है"
मामी एकदम से चुप हो गयी
"क्या बात है, इसमें बुरा मान गयी क्या?"
"नहीं बेटा, तेरे मामा की बजह से ही मैं रांड बन गयी हूँ.."
"क्यूँ उन्होंने क्या किया?"
"एक बार खेत मैं मैंने उनको एक औरत के साथ गुरछर्रे उड़ाते देखा, मैं तेरे मामा से बहोत प्यार करती थी, लेकिन उस दिन बाद मेरा सबसे मन ही उठ गया..उनको मैंने कुछ कहा नहीं, लेकिन घुस्से मैं मेरा भी पैर फिसल गया, लेकिन अब मुझे भी मजा आने लगा है किसी और से चुदवाने लेने मैं.. तेरे मामा तो अब ५० साल के भी ऊपर के है, और इतने साल हो गए शादी को, के अब सिर्फ अपना काम निपटा लेते है बेड मैं, मेरे खयालों को नहीं देखते..काम होजाने बाद मुंह फेरके सो जाते है.. अब दूसरी औरत भी मिल गयी है उनको.. तो मैंने भी सोचा मैं भी क्यूँ मजा ना लू?"
ये बात सुनके तो मेरे होश ही उड़ गए, लेकिन मन मैं लड्डू फुट रहे थे; मामी की जब चाहे गांड मारने मिलेगी ये सोचकर..


"अच्छा, ठीक कहा मामी आपने, लेकिन ये तो बताइए किसको और कहा आपने आपके इस गदराये बदन का मजा उठाने दिया..?"
तब मामीने मुझे पूरी स्टोरी बताई, वो आपसे में शेयर करता हूँ..
बात ६ महीने पहले की है..

मामा का बाहर चल रहा चक्कर देखकर मामी परेशान थी.. उन्होंने मामा को अभी इसका एहसास नहीं कराया था की उनका बाहर चक्कर है ये उनको पता है. थोडासा रिलैक्स होने के लिए वो आज मायके जाने का सोच रही थी. उनका मायका उनके ससुराल से करीब १२० किलोमीटर दूर था. हमेशा तो मामा ही कार में उन्हें छोड़ते थे, लेकिन जब काम में होते थे तो उनको बस से ही जाना पड़ता था.. सीधी बस भी नहीं थी उनके मायके के लिए.. बिचमें बस बदलनी पड़ती थी.. आज तो मामाजी छोड़ने आने वाले नहीं थे वो उनको पक्का पता था.. जब वो मायके जाएँगी तो उनके मजे ही थे.और मामीका लड़का भी पढाई केलिए शहरमें रहता था, इसलिए वो भी उन्हें छोड़ने आ नहीं सकता.यही सोचते सोचते मामी अपने काम निपटा रही थी सुबह के.रोज की तरह बाहर के दरवाजे के सामने झाड़ू लगाकर रंगोली बना रही थी. मेरे मामा-मामी का घर एक गली में था. भाइयो से अलग होने के बाद घर का ये वाला हिस्सा उन्होंने लिया था..वो गली सिर्फ ५ फीट की थी और सारे मकान हर गाव में होते है वैसे सटे हुए थे एक दुसरे से. मामाजीने गाव के बाहर नयिसी बसी हुयी कॉलोनी जमीन खरीदी थी घर बनाने के लिए.काम शुरू भी होगया था तभी उसपे कोर्ट में केस दर्ज होगया. अभी उसका निकाल मामा के बाजु लग गया था और वो फिरसे घर बनाना शुरू करनेवाले थे.
मामा के घर दरवाजे के सामने ही अस्लम चाचा रहते थे.. जैसे ही मामी रंगोली बनाने झुकी तभी वो बाहर आकर मामी का "नेत्र चोदन" करते करते बातचीत करने लगे..
"कैसे हो भाभीजी, भाईसाब क्या कर रहे है?"
"ठीक हूँ, वो खेतमें गए है,पानी डालने, गन्ना लगाया है न, ३-४ बार जाना पड़ता है.. और ८ बजे दुक्कान भी खोलना होता है, तो सुबह ही जाते है. आपका क्या हाल है? दो दिन से कोई दिखा नहीं घरमें? "
"हाँ, में हैदराबाद गया था माल उठाने और बीबी, बच्चोंको लेकर मायके गयी है.."
अस्लम चाचा गाव के ही एक बड़े व्यापारी का माल लेने-जाने का काम करते थे अपने टेम्पो में ..
"तो चाय-नाश्ते का क्या? आ जाईये हमारे यहाँ.."
"नहीं नहीं, आप क्यूँ तकलीफ ले रहे हो.."
"अजी इसमें तकलीफ की क्या बात है, पडोसी हो आप.."
ऐसे ही बातचीत में वो चाय पिने के लिए आगये..

जैसे की मैंने बताया है, मजबूरी के कारन मामा-मामी उस घर मैं रह रहे थे फिर भी मामीजी आजूबाजू के लोगोंसे अच्छे से पेश आती थी..घर मैं सिर्फ २ ही कमरे थे. एक किचन और हॉल. किचन में ही बाथरूम था.घर छोटा था इसलिये मामी किराये का मकान लेने के लिए मामा से कह रही थी. लेकिन घर में सिर्फ २ लोग थे और खुदका घर छोडके किराये का मकान लेना मामाको ठीक नहीं लग रहा था.. और कुछ दिनों की ही बात थी.
बाहर दरवाजे के सामने झाड़ू लगाके, रंगोली बनाकर मामी नहाने जाने वाली थी, इसलिए उन्होंने जो कपडे पहनने थे वो बाहर निकालकर हॉलमें जो बेड था उसपर रखे हुए थे. साड़ी,पेटीकोट होता तो अलग बात थी , लेकिन मामीने जो निकर पहननी थी वो भी उपरही ही रखी थी. ये बात उनके ध्यान में अस्लम चाचा जब चाय पिने अंदर आगये और उसी कपड़ों के पास बेठ गए तब आयी. ये देखकर मामी लाल हो गयी शरम से. लेकिन अब कपडे उठाने जाओ तो चाचा के पास जाना पड़ता इसलिए उन्होंने कुछ हुआ ही नहीं ऐसे दिखाकर चाय बनाने अंदर चली गयी..बाहर मामी का निकर देखकर अस्लम चाचा का लंड खड़ा हो गया था. वो सिर्फ लुंगी ही पहनके आये थे और शायद अन्दर भी कुछ पहना नहीं था.. इसलिए खड़े हुए लंड की बजह से लुंगी का तम्बू बन गया..मेरी मामी ५ फीट २ इंच की बहोत गदरायी, गोरी चिट्टी सी औरत है.. बहोत खानदानी दिखती है.. ऐसी औरत की निकर देखकर अस्लम चाचा का हाल बहोत बुरा हो रहा था. चाय गैस पे रखकर मामीने बाहर आकर उनका हाल देखा तो उनको भी मजा आने लगा..थोड़ीदेर बाद बातचीत करके, चाय पीकर अस्लम चाचा चले गए, मामीभी नहाने जाने के लिए कपडे उठाने लगी, तो उनको समझ में आया अस्लम चाचाने उनकी निकर हाथ में ली थी.. शायद सूंघी भी होगी क्या पता.. ये सोचकर मामीजी गरम हो गयी.. जैसा की हमें सबको पता है हवस की सीमा नहीं होती, ये जितना आदमियों के बारे में सही है उतना ही औरतों पे भी लागू करता है. मामी तो अभीभी मामा को सबक सिखाने के तरीके ढूंढ़ रही थी. उसी में इस घटना के बाद मामी के मन में अस्लम चाचा जैसे काले, मोटे और ड्राईवर का काम करनेवाले आदमी के लिए वासना पैदा होगई.


मामीजी नहाने के बाद फिर से मायके जाने की तय्यारी करने लगी , तभी उनको खयाल आया अस्लम भाईसाब को नाश्ते पे बुलाने का , मामाजी आने से पहले वो उन्हें बुलाना चाहती थी। इसीलिए वो उनके घर चली गयी उन्हें बुलानेकेलिये। दरवाजा थोडासा खुला था,इस्सलिये मामीने और खोलके अंदर झाका (गाव में तो दरवाजा खटखटाना जैसे बुरे मैनर्स थे, कोई भी किसीके घर घुस जाता है) जैसे ही अंदर गयी तो उन्होंने देखा चाचा पुरे नंगे थे और शायद मुठ मार रहे थे। थोड़े दिन पहले ये घटना घटी होती तो मामीजी झट से उधर से चली जाती। लेकिन मामी के सर वासना का भूत सवार था और उन्हें पता था वो मामीजी की पैंटी देखने की बजह से ही तने हुए लंड को खाली कर रहे थे, इस्सलिये मामीजिने उधर ही खड़े रह के खास लिया। हडबडाहट में चाचा पलट गए और मामीजी को देखके चौक गए। दरवाजा बंद करना ही भूल गए थे वो, मामीजी की पैंटी को देखके ही उनका दिमाग काम करना बंद हो गया था। इतनी देर मूठ मारने के बाद भी उनका पानी नहीं निकला था अभीतक। उनका लंड अभीभी तना था और मामी को सलाम कर रहा था। मामीजीकी हालत भी बुरी होगई उनका वो मोटा और लम्बा लंड देखके और उनके मुंह से "अगो बाई !" (surprised exclamation in marathi) निकल गया। चाचा पुरे नंगे खड़े थे मामीके सामने फिर भी मामी वहासे तस से मस न हुयी। चाचाने जल्दीसे अपनी लुंगी उठाई और अपने लंड को ढक लिया।लेकिन वो पतले कपडे की लुंगी से और भी बाहर आ रहा था , और जैसे मामीको देखनेकेलिये तड़प रहा था। मामी भी अब मजाक के मूड में आगई।
"भाभीजी को याद कर रहे थे क्या? देखो कैसे तना हुआ है"
 


चाचाभी समझ गये मामीजी के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने भी मामीका मन टटोलनेके लिए कह दिया,
"हाँ, भाभीजी को ही याद कर रहा था , लेकिन आप जिस भाभीको समझ रही ही उसे नहीं, आप कैसे आयी थी?"
"आपको नाश्ते के लिए बुलाने आयी थी, लेकिन लगता है आप तो बिजी है। देर लगने वाली हो तो मदत कर दू क्या?"
" हाँ क्यूँ नहीं भाभीजी, लेकिन काम थोडा "सख्त " है , कर पाएंगी क्या?
"दिखाओ तो सही कितना सख्त है "
ऐसा कहके मामीजीने चाचा के पास जाकर उनकी लुंगी हटा दी.....
"हाय राम, ये तो बहोत ही सख्त और बड़ा काम है, इसे तो नाजुक हाथोंसे करना पड़ेगा"
"हाँ, तो आपके हाथ भी तो नाजुक ही है, हो जाइये शुरू" ऐसा कहके अस्लम चाचाने मामी का हाथ हाथोमे लेकर अपने लंड पर थमा दिया।
मामीभी उनके circumcised काले लंड को अपने गोरे गोरे हाथोमे लेकर सेहलाने लगी। लेकिन उनका लंड पानी छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था, बल्कि अब तो और भी फुद्फुदाने लगा था।।
"हाय राम, ये तो बहोत ही सख्त काम है, आप बेठिये जरा खुर्चीपे, इसे आरामसे करते है"
"हाँ, भाभीजी आपही के बजह से सख्त हुआ है ये काम"
"वो कैसे, मैंने क्या किया ?"
"आपकी वो फुल पत्ती वाली चड्डी देखली ना, तो ये हरामी लंड तन गया उधर ही"
अपनी पैंटी की बात सुनके मामी शर्म से लाल होगई ..
"ठीक है, अब में ही इस काम को निपटा देती हूँ"

मामी और आगे पीछे करने लगी चाचा के लंड को, लेकिन अस्लम चाचा का लंड अब सुख गया था इस्सलिये मामीजीने उनके लंड पर थूक कर उसे गिला कर दिया। और वो उसे फिर से आगे पीछे करने लगी।।
चाचा का लंड अब बहोत ही फुल गया था, लेकिन अभीभी उनका पानी नहीं निकल रहा था।। चाचा अब बहोत पागल बन गए थे, उनके सपनोंकी रानी जो उनका लंड हिला रही थी। वो भी अब मामी के बालोंसे खेलने लगे। उनके ब्लाउजकी ऊपर से दिखनेवाली नंगी पीठको सहलाने लगे।। पीठ के उपरसे धीरे धीरे चाचाके हाथ मामीके मम्मों की तरफ बढ़ने लगे, और वो मामीके ब्लाउज के हुक निकालने लगे। मामी अभीभी उनके घुटनों पे बैठ के चाचा के लंड को आगे पीछे कर रही थी।। चाचाने फिर मामीको अपने टांगोमें जखड लिया और लंड को मामीके हाथोंसे निकालकर उनके रसीले होठोंपे रख दिया,
"भाभिजान, सिर्फ हाथोंसे हिलानेसे नहीं मानेगा ये, जरा आपके मुंह से चाट भी लो इस्से" ऐसा कहके चाचाने लंड को मामीके मुंह में घुसा दिया।।
जब कोई इमली या कोई खट्टी चीज खाता है तब जैसा मुंह करता है वैसा मुंह करके मामी भी चाचा के लंड के सुपडे को चाटने लगी।। चाचा ने ब्लाउज के सारे हुक निकालके ब्लाउजको मामीके हाथोंसे निकाल दिया।।
मामीजी अब सिर्फ ब्रा और साड़ी में चाचा के घुट्नोंओं के बीच खडी थी उनके घुट्नोंपे।। चाचा मामीके मोटे मोटे कंधोंको अब सहलाने लगे थे।। बचपन में दी जाने वाली 'BCG' और 'देवी' की टीका के कारन मामी के कंधोंपे घाव था , वो बहोत ही उत्तेजित करने लगा असलम चाचा को, उसके बजह से चाचा का लंड और भी फुर्फुराने लग गया।।


अस्लम चाचा अब मामीका ब्रा उतारने के लिए बेकाबू हुए जा रहे थे। लेकिन मामी झट से खड़ी होकर दूर चली गयी चाचा के पहोचसे।मामाजी का आने का समय हो गया था। इस्सलिये मामी जल्दी जल्दी ब्लाउज पहनने लग गयी।
"क्या हुआ भाभीजान?" ऐसा पूछते पूछते अस्लमने मामीजीको अपनी बाहोंमे भर लिया।।
"अभी नहीं अस्लम भाईसाब, इनके आने का समय होगया हे, में जाती हूँ"
"ऐसा हमें आधा अधुरा छोडके मत जाओ जान, अभीतक आपके इस गदराये बदन का दीदार भी नहीं करवाया आपने, और ऐसे ही जाने की बात कर रही है ?"
मामी का आँचल अभी भी गिरा था,चाचा के सहलाने से उनके मम्मे सख्त हो गए थे और ब्लाउज में समां नहीं पा रहे थे।
अस्लम चाचा अब मामी के मोटे मोटे गालोंको किस करने लगे,मामी के होठोंको अपने होठोंमे वो कैद करने ही वाले थे की मामी उनके बाहोंसे छुट निकली। चाचाने लेकिन मामीका हाथ पकड़ लिया और उनको फिर अपने बाहोंमे धर दबोचा,और उनके गांड को मसलते मसलते उनके मम्मोंपर अपना सर रगड़ने लगे।
"जाने दीजिये भाईजान, ये आगये तो मुसीबत होगी,अब तो हम कभीभी मिल सकते है"
"ठीक है,लेकिन फिर कब मिलोगी ?"
"आज तो में बाहर गाव जा रही हूँ, आप भी माल उठाने जा रहे हो ना?"
"हाँ पूना जा रहा हूँ"
"अरे, तो में भी आप के साथ आ सकती हूँ, मेरा मायका पूना बैंगलोर हाईवे से 10 किमी दूर है, उस एग्ज़िट पे आप मुझे छोड़ दो तो में चली जाउंगी बस में"
"लेकिन टेम्पो में आओगी आप मेरे साथ?"
"हाँ, क्यूँ नहीं, लेकिन किसी को बता ना मत, में उनको कहती हूँ बस से जा रही हूँ, और उन्होंने बस में बिठा दिया तो अगले गाव उतर जाती हूँ, आप मेरा वेट करना वहापर किसी सुनसान जगह और मुझे कॉल कर के बता देना कहा आऊं में वो"
"हाय भाभिजान आपने तो बड़ा मस्त प्लान बना दिया, टेम्पो के पीछे बहोत जगह भी है, आपके इस गदराये बदन का दीदार करने के लिए"
ये सुनकर मामीजी शरमाकर वहा से भाग निकलने कोशिश करने लगी। लेकिन चाचा अभीभी उनको अपने बाहोंमे जख्ड़े हुए थे।
"एक ही शर्त पे जाने दूंगा भाभीजी, जल्दी से इस हरामी लंड का पानी निकल दीजिये, अब देर नहीं लगेगी,छूटने ही वाला है।"
मामी झट से फिर अपने घुटनोंके बल बैठके चाचा का लंड मुंह में लेकर चूसने लग गयी ..


मामी चाचा का लंड चूसते चूसते उनके गांड से खेलने लगी .. चाचा और भी उत्तेजित होने लगे इससे। मामी अपनी जबान की टिप से धीरे धीरे चाचा के लंड के पूरी लम्बाई पे सर्किल बनाने लगी। जब वो उनके लंड के छेद के पास आगयी तो मामीने अपनी जबान की टिप थोड़ी देर के लिए उनके छेद पे टिका दी,ये तरीका झट से असर कर गया और चाचा का पानी सुनामी की तरह बाहर आने लगा। मामीने होशियारी रखते हुए उस सुनामी की रस्ते से दूर होगई,फिर भी चाचा के लंड से निकला हुआ गाढ़ा पानी थोडासा मामीके मुंह पे और आंचल गिरा होने के कारन उनके ब्लाउज पे गिर गया। मामीने उसे अपनी हाथोंसे ही पोछकर अपना आंचल ठीक कर खड़ी होने लगी । लेकिन उतने में ही चाचा ने बदतमीजी करते हुए मामी के होठोंपे अपना लंड पोछ दिया। मामी भी होठोंपे जुबान फिराते फिराते झूट झूट गुस्सा होकर वहासे भाग निकली।

दोपहर चार बजे मामाजी ने मामीजी को बस में बिठा दिया। जैसे ही बस निकली मामीने अस्लम चाचा को फ़ोन करके इत्तला करदी, और अगले गाव जहाँ पर बस रूकेगी वह आकर इंतज़ार करने केलिये कह दिया। आधे घंटे बाद जब बस रुकी अगले गाव में, तो मामी उतर गयी और चाचाके बताये जगह पर पोहोच गयी। यहाँ पर भी मामा के पहचानवाले मामी को देखने की सम्भावना थी इसलिए थोडा दूर ही चाचा ने अपना टेम्पो खड़ा कर दिया था। मामी पोहोचते ही चाचा ने उन्हें आगे बेठने केलिए कहा लेकिन कोई देख लेगा,थोडा अँधेरा पड़ने के बाद आगे आती हूँ ऐसा कहके मामी पीछे चढ़ गयी। टेम्पो चारो बाजू से कवर किया हुआ था इसीलिए वहा किसीके दिखने की सम्भावना नहीं थी।चाचा ने नाखुशी से ही पीछे का पडदा हटाया और मामीको चढ़ा दिया टेम्पो में। उसमे भी चाचा ने मामी की गांड को पूरीतरह मसल दिया चढाते वक़्त। और ऐसे अस्लम चाचा और मामीजी का टेम्पो में सफ़र शुरु होगया।
ठंडी के दिन थे, इसलिए अँधेरा जल्दी पड़ गया था।अँधेरा पड़ने के बाद चाचा टेम्पो रूका कर मामीजी को आगे लेने के लिए उतर गए। चाचा ने सफ़र का टाइम बढ़ाने के लिए हाईवे छोडके दूसरा ही रास्ता ले लिया था,जो थोडा लम्बा था ,उसपे भीड़ कम थी और सूनसान भी था। इसीका फायदा उठाके चाचा ने मामीको अपने गोदिमेही उठाके आगे ले कर आगये। 70 किलो से कम नहीं होगा मामीजी का वजन (उनके गांड का ही 50 किलो होगा) लेकिन चाचा ने उनको फूल की तरह उठा लिया।
थोड़े दूर जाते ही एक ढाबा लग गया , ढाबे को देखतेही चाचा ने गाडी रोक दि।
"भाभीजी खाना खाने रूक जाये क्या ?"
"नहीं भाईसाब, देर हो जाएगी, घर में इन्तजार कर रहे होंगे"
"ज्यादा देर नहीं लगेगी,और में आपको आपके गाव ही छोड़ दूंगा, तो आपका टाइम भी बचेगा, और आगे अच्छा ढाबा नहीं मिला तो मेरे खाने के वांधे हो जायेंगे।"
ऐसा कहके चाचा ने खाना खाने रूकने केलिए मामी को मना लिया।
वो पंजाबी टाइप ढाबा था। थोडे बहुत ही फॅमिली लेकर आये थे लोग, बाकि सब ड्राईवर लोग ही थे"
मामी अब परेशान हो रही थी।जल्दी नहीं पहुंची मायके तो सब लोग परेशान हो जाते, इस्सलिये वो जल्दबाजी कर रही थी। उसमे चाचा ने व्हिस्की मंगा ली ।मामी अब वाकई चिंतित होने लगी।
"अरे भाईसाब, दारु पीके ड्राइव करेंगे क्या?"
"उतना तो चलता है, अब आदत सी होगई है,नहीं पी तो प्रॉब्लम हो जाएगी"
मामीजी पहली बार ही ऐसे माहोल में आयी थी, उनको समझ नहीं आ रहा था जो कर रही है उससे उन्हें आगे पछतावा तो नहीं होगा?
"जल्दी की जिए भाईसाब,जल्दी निकलते है यहासे"
"हाँ, बस थोड़ी ही देर में, आप भी कुछ लेंगी क्या, कोल्ड्रिंक या बियर ली जिए, बियर कोल्ड्रिंक जैसी ही होती है "
"छि छि, मैं नहीं लुंगी"
"कुछ नहीं होगा भाभिजान थोड़ी पि लेने से, थोडा आराम मिल जायेगा इस टेम्पो के सफ़र में,नहीं तो हालत बुरी हो जाती है"
ऐसा ही कुछ भी कहके चाचा ने मामीजी की लिए भी बियर मंगवा ली।बियर का पहलाही घुट लेकर ही मामी ने वो थूक दी। एरंडी के तेल को पीने जैसा लगा उनको। जब पेट सी थी तो डिलीवरी आराम से और टाइम पे होने केलिए बहोत सारा एरंडी का तेल पिने पड़ा था उन्हें।और उनके पास करने के लिए भी कुछ नहीं था।चाचा भी व्हिस्की मारते मारते 'भाभीजान भाभीजान' ही किये जा रहे थे।इस्सलिये एक घुट एक घुट करते करते उन्होंने पूरी बियर की पाइंट ख़तम कर दी और, और एक मंगवा ली।अब थोडा थोडा मजेदार लग रहा था मामी को।रिलैक्स फील करने लगी वो।और हम सबको पता है बियर का जब स्वाद आने लगता है तो वो कितनी मीठी लगने लगती है।
चाचा ने भी धीरे धीरे करके 2 लार्ज पेग मार लिए थे। लेकिन होश में थे अभीभी, सिर्फ बडबड़ाये जा रहे थे। मामी ने जब एक पाइंट ख़तम कर दिया था बियर का तो चाचा जो उनके सामने बैठे थे मामी के,उनके पास जाकर बैठ गये। छोटासा बेंच ही था बैठने केलिए, इस्सलिये दोनोंको सटे हुए बेठना पड़ रहा था। चाचा अब मामीजी के गदराये बदन से खेलने लग गए थे। उनके कमर में हाथ डालके उनके मोटी मोटी जांघो को सहला रहे थे।
"थोड़ी व्हिस्की भी ट्राय कर लो मेरी जान" ऐसा कहके चाचा ने अपना ग्लास उनके आगे कर दिया।
"नहीं नहीं, मुझे झूठा खाना-पीना अच्छा नहीं लगता"
चाचा इस बात पर हसने लगे और बोले," दोपहर को तो मजे लेकर मेरा लंड चूस रही थी, अब झूठा खाने में क्या शरमाना मेरी जान, पिलो थोड़ी सी व्हिस्की"
मामीजी ने बात को आगे न बढ़ाते हुए, चाचा ने सामने की हुई ग्लास से थोड़ी व्हिस्की पी ली।
व्हिस्की के साथ साथ खाने के लिए चाचा ने तंदूरी चिकन मंगवाया था, और वो जान बुझकर मामी जो पीस खाके रखती थी वही खाते थे और मामीको अपना खाया हुआ खाने को मजबूर कर रहे थे। मामीने कभी मामा का भी झूठा नहीं खाया था अब तक लेकिन आज अस्लम चाचा का झूठा खा रही थी।एक ही दिन में मामीने जो जो किया था उस्सपर उनका भी यकीन नहीं हो रहा था। किसीने उनका भविष्य बता दिया होता की वो ये सब करनेवाली है तो मामी उसपे सपने में भी यकीन नहीं करती। लेकिन किसीने सच ही कहा है "Truth is always stranger than the fiction".
 
 
 
 
 









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