Saturday, March 23, 2013

चुदाइ का दूसरा रूप--1

सेक्सी कहानियाँ
चुदाइ का दूसरा रूप--1

मैं अपने पति के पास देल्ही आ गई थी गोआ मे 15 दिन रहने के बाद. गोआ मे
रहते हुए मैने अंजू के साथ लेज़्बीयन सेक्स का खेल खेला था. मेरे बहुत से
चाहने वालों ने अपनी मैल मे लिखा है कि चुदाई मे असंतुष्ट औरत को चोद कर
संतुष्ट करना एक समाज सेवा है. मैं तो हमेशा ही चुदाई और चुदाई को प्यार
करने वालों को प्यार करती हूँ.

मैं और मेरे पति अभी अभी साउत आफ्रिका मे फुटबॉल का वर्ल्ड कप देख कर
लौटें हैं. हमारा साउत आफ्रिका का दौरा और मॅच के टिकेट्स मेरे पति को
उनकी ऑफीस की तरफ से हमारी शादी का तोहफा था.

अपने साउत आफ्रिका मे होने के दौरान मैं अपने चाहने वालों को ये नहीं बता
पाई कि वहाँ जाने से पहले क्या क्या हुआ था. अब मैने सोचा है कि आप को
सिलसिलेवार सब बताऊ.

तो....... बात वहाँ से शुरू करती हूँ जहाँ पर हम मेरी पिच्छली कहानी मे थे.

मैं 10 दिन गोआ मे बिताने के बाद अपने पति के पास वापस देल्ही आ गई थी.
गोआ मे मेरा ज़्यादातर समय मेरे ससुराल मे ही बीता था. वहाँ मुझे अंजू के
साथ ज़्यादा चुदाई का मौका नहीं मिला था पर उस दौरान हमने मिलकर और दो
बार लेज़्बीयन चुदाई की थी जब हमको मौका मिला था. अंजू बहुत खुश थी, ये
मैने उसके चेहरे पर सॉफ सॉफ देखा. मुझे अंजू के बारे मे सोच कर बहुत दुख
होता है. वो जवान है, बहुत खूबसूरत है पर उसका पति उसको चोद कर संतुष्ट
नहीं कर पाता. खैर....... ये तो किस्मत की बात है.

गोआ से वापस आने के बाद, एक शाम को मैं मेरे पति का इंतज़ार कर रही थी
क्यों की हमको उनके एक दोस्त की शादी की सालगिरह की पार्टी मे जाना था.
मैं जान बूझ कर तय्यार नहीं हुई थी क्यों की मैं जानती थी कि मेरे पति
तय्यार होने के लिए, शायद मेरे साथ ही शाम का स्नान करना पसंद करेंगे.
ज़्यादातर हम साथ साथ ही नहाते हैं. मैं सिर्फ़ एक गाउन पहने हुए थी
जिसके अंदर मैने कुछ भी नही पहना था. मैं जानती हूँ कि मेरे पति मुझे ऐसे
देखना पसंद करतें है. मैं बताना चाहती हूँ कि हम दोनो ही घर मे चाहे जैसे
रह सकते हैं क्यों की यहाँ हमारे साथ कोई तीसरा नहीं रहता है, सिर्फ़ मैं
और मेरे पति. खिड़कियों पर पर्दे और गहरे रंग के शीशे होने की वजह से हम
घर मे जैसे चाहे रह सकतें हैं, जो चाहे कर सकतें है. बाहर से किसी का भी
हमको देख पाना संभव नहीं है. हम एक 9 मंज़िल की इमारत की तीसरी मंज़िल पर
रहतें हैं.

मेरे पति अपने पास की चाबी से दरवाजा खोल कर घर मे आए तो मुझे तुरंत ही
पता चल गया क्यों कि मैं बाहरी कमरे मे ही बैठ कर टी.वी. देख रही थी.
उनकी तेज आँखों ने तुरंत ही भाँप लिया कि मैं उनके साथ नहाने को तय्यार
हूँ. वो मुस्कराए तो जवाब मे मैं भी मुस्करा पड़ी. वो मेरे नज़दीक आए और
मुझे अपनी बाहों मे भर लिया, जो कि वो हमेशा ही घर आते ही करतें हैं.
मैने भी उनको बाहों मे भरा और हमने एक दूसरे के रसीले होंठ चूस्ते हुए
चुंबन किया.

वो बोले - तय्यार हो नहाने के लिए ?

मैने कहा - हां जान. मैं तय्यार हूँ.

उन्होने जवाब दिया - ठीक है. एक ग्लास पानी मिलेगा पीने के लिए ?

मैं रसोई से उनके लिए पानी का ग्लास ले कर आई तो मैने देखा की उन्होने
अपने सारे कपड़े उतार दिए हैं और सिर्फ़ चड्डी पहने सोफा पर बैठे हैं. जब
मैने उनको पानी का ग्लास दिया तो उन्होने अपने एक हाथ से पानी का ग्लास
पकड़ा और दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी गोद मे बिठा लिया.
उन्होने पानी पिया और फिर से मेरे होठों को चूमा. मैं उनके चुंबन का आनंद
लेती हुई उनके बालों मे हाथ फिरा रही थी. प्यार और चुदाई की आग हमारे बीच
भड़कनी शुरू हो चुकी थी.

यहाँ मैं आप को फिर से बता दू कि मैं पिच्छले 15 सालों से चुदवा रही हूँ
जब मैं सिर्फ़ 14 साल की थी तब से. अब मेरी शादी को 7 महीने हो चुके हैं.
शादी के पहले मैं साप्ताह मे 4 या 5 बार चुदवाती थी और अब शादी होने के
बाद चुदवाने की गिनती बढ़ कर दिन मे कम से कम दो बार हो गई है. सबसे
ज़्यादा खुशी की बात तो ये है कि हमेशा ही, जब भी अकेले होते हैं, एक
दूसरे को छुते हैं, चुंबन करतें हैं, मैने पाया है कि चुदाई की गर्मी वही
पुरानी गर्मी जैसी है. मैं बहुत किस्मत वाली हूँ कि मुझे मेरे जैसा ही
चुदाई का साथी मिला है.

हमारा चुंबन ख़तम होने के बाद उन्होने मुझे किसी गुड़िया की तरह अपने
हाथों मे उठाया और मुझे बाथरूम मे ले आए. उस समय 6.30 हुए थे और हमारे
पास पार्टी मे जाने के पहले काफ़ी समय था. उन्होने फव्वारा चालू किया और
हम दोनो भीगने लगे. मैने अपना गीला गाउन उतार कर अपने सेक्सी बदन को
कपड़े से आज़ाद किया. गर्मी का मौसम और फव्वारे का ठंडा ठंडा पानी. लेकिन
वो ठंडा पानी भी हमारी चुदाई की गर्मी को कम नही कर रहा था, बल्कि और
बढ़ा रहा था. मैने उनकी चड्डी भी उतार दी और देखा की उनका खड़ा हुआ लंबा
लॉडा मुझे सलाम कर रहा था. मैने देखा की उनके लंड के आस पास कुछ बॉल उग
आए हैं. मेरी चूत तो बिल्कुल सॉफ, बिना बालों के, चिकनी थी क्यों की मैने
तो दो दिन पहले ही अपनी चूत के बॉल सॉफ किए थे. मैने उनके खड़े हुए,
सख़्त, लंबे और मोटे लंड लो अपने हाथ मे पकड़ा. उनके लंड के नीचे लटकी
गोलियों की थैली पर से होता हुआ पानी नीचे गिर रहा था.

मेरे पति को पता है कि मुझे चूत या लंड पर बाल पसंद नही है, खास कर के
मुख मैथून करते वक़्त. वो तुरंत समझ गये कि मेरी आँखों ने क्या देखा है.
उन्होने तुरंत नीचे के बाल सॉफ करने वाला सामान बाथरूम की छ्होटी आलमारी
से निकाला. मैं फव्वारे के नीचे बैठी उनको देख रही थी जबकि वो फव्वारे के
बरसते पानी से बाहर चले गये. उन्होने अपने खड़े लंड के आस पास, जहाँ जहाँ
बाल थे, और लंड के नीचे लटकी गोलियों की थैली पर भी थोड़ी शेविंग क्रीम
लगाई. हमेशा की तरह मैने उनको अपनी झाँटें सॉफ करने मे मदद की क्यों की
मुझे ये काम पसंद है. जब वो रेज़र से अपने बाल सॉफ कर रहे थे तो मैने
उनका लंड पकड़ रखा था और मैने उनके लंड के नीचे की गोलियों की थैली को भी
इधर उधर कर के वहाँ से बॉल सॉफ करने मे उनकी मदद की. जल्दी ही उनका सुंदर
लंड बिना बालों के, चिकना हो कर मेरी आँखों के सामने था. अब वो भी
फव्वारे के नीचे आ गये थे और उनके लॉड के आस पास लगी साबुन पानी मे बह गई
और उनका लंड चमक उठा. मैने बिना कोई समय बर्बाद किए तुरंत ही नीचे बैठे
बैठे उनका प्यारा सा, खड़ा हुआ, सख़्त, लंबा और मोटा लंड चूसने के लिए
अपने मूह मे ले लिया. वो खड़े थे और उनके हाथ मेरे सिर के बालों मे प्यार
से घूमने लगे जबकि मैं बाथरूम के फर्श पर बैठ कर उनके लंड को चूस रही थी.
आप को मेरे पति की मर्दानगी मालूम ही है की उनके लंड से पानी निकालने मे
काफ़ी वक़्त लगता है और ज़्यादातर उनकी एक चुदाई मे मेरी दो चुदाई हो
जाती है. उनकी ये मर्दानगी हम दोनो के लिए बड़े गर्व की बात है. अब मुझे
उनको अपने हाथ और मूह से ही इतना गरम करना था और इतना आगे ले जाना था की
चोद्ते वक़्त उनके लंड से मेरे खुद के झड़ने के साथ ही पानी निकले.
फव्वारे से बरसता पानी हम को और भी सेक्सी बना रहा था. उन के लंड का मूह
मेरे मूह मे था और निचला हिस्सा मेरे हाथ मे था. मेरी जीभ उनके लंड के
मूह, सूपदे पर घूम रही थी जो उनको पूरा मज़ा दे रही थी. वो हमेशा कहतें
हैं कि मैं बहुत अच्छा लंड चुस्ती और चाट ती हूँ. मैं खुद जानती हूँ की
मैं कितनी क़ाबलियत के साथ लंड चुस्ती हूँ. मैं उनका लंड अपनी हथेली मे
पकड़ कर आगे पीछे करते हुए उनके लंड का सूपड़ा चूस रही थी. उनका लंड
चूस्ते और मूठ मारते हुए मुझे ये अंदाज़ा हो गया था कि मैं उनको आधी दूर
ले आई हूँ और अब हम अपना पसदीदा चुदाई का खेल शुरू कर सकतें हैं. मेरी
चूत तो उनका लंड चूस्ते चूस्ते ही काफ़ी गीली हो चुकी थी और उनका लंड
लेने को तय्यार थी.

हम दोनो पानी बरसाते फव्वारे के नीचे आमने सामने खड़े थे. मेरी चुचियों
और मेरी निपल्स पर से होता हुआ फव्वारे का पानी बह रहा था. उन्होने मेरी
गीली चुचियों को, गीली निपल्स को बहुत ही प्यार से चूसा.

हम दोनो को ही हमेशा अलग अलग पोज़िशन मे चुदाई करना पसंद है. उन्होने
अपने हाथ मेरे पीछे करते हुए मुझे मेरी नंगी गंद पकड़ कर उठा लिया. मैं
जैसे उनकी हथेलियों पर अपनी गंद टीका कर बैठी थी. मैं चुदवाने के लिए
तय्यार थी और मेरी चूत भी उनके लंड का स्वागत करने को तय्यार थी. क्यों
कि मैं उनके दोनो हाथ पर अपनी गंद रख कर बैठी थी और वो खड़े थे, मैने
अपना हाथ नीचे करके, उनके इंतज़ार करते हुए गरम लॉड को पकड़ कर अपनी चूत
के दरवाजे पर लगाया और उन्होने मेरी गंद ज़रा दबाई तो उनका फंफनता हुआ
लंड मेरी चूत मे घुसने लगा. चुदाई की इस पोज़िशन मे मेरे लिए ज़्यादा कुछ
करने को नही था सिवाय चुदवाने के. वो मेरी गंद पकड़े हुए थे और मुझे उपर
नीचे, उपर नीचे कर रहे थे. मेरे हाथ उनकी गर्दन पर लिपटे हुए थे. हमेशा
की तरह उनका लंबा लंड मेरी चूत की गहराइयों मे मज़ा देने वाले स्थान को
खत खता रहा था. वो मेरी गंद पकड़ कर मुझे चोद रहे थे और मैं अपनी गंद
उनके हाथ मे रख कर मज़े से चुदवा रही थी. फव्वारे के बरसते पानी के नीचे
जो जवान नंगे जिस्म जल रहे थे और अपनी चुदाई की गर्मी को कम करने की
कोशिश कर रहे थे. बहते पानी मे भी चुदाई की फ़चा फॅक .. फ़चा फॅक........
फाका फक...... फाका फक हो रही थी. एक बार फिर मुझे लगा कि मैं उनसे कहीं
पहले ही झाड़ जाओंगी. मैं अपने पूरे अनुभव और क़ाबलियत के साथ इस तरह
चुदवा रही थी कि उनको भरपूर मज़ा मुझको चोदने मे आए. अब उनकी चोदने की
रफ़्तार बढ़ गई थी और उनका लंड तेज़ी से और जल्दी जल्दी मेरी गीली चूत मे
अंदर बाहर हो रहा था. हमारी आँखें चुदाई के आनंद के मारे बंद हुई जा रही
थी. चुदाई का पूरा दारोमदार उन पर था और वो मेरी नंगी गंद पकड़ कर धक्के
लगा रहे थे. मैं जोरदार चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी. उनके लॅंड के,
मेरी चूत मे हर धक्के के साथ मेरी चुचियाँ उच्छल रही थी. वो मुझे किसी
गुड़िया की तरह अपने हाथों मे उठाए बाथरूम मे बरसते पानी के नीचे चोद रहे
थे. मुझे उनके तेज होते धक्कों, उनके लंड के मेरी चूत मे आते जाते और
अधिक सख़्त होने से ये पता चल चुका था कि जल्दी ही उनका लंड मेरी चूत मे
अपना लंड रस बरसाने वाला है. मैं तो पहले से ही अपने झड़ने के काफ़ी करीब
थी. अचानक ही उनकी चुदाई की रफ़्तार तूफ़ानी हो गई और मैं उनके हाथों मे
किसी खिलोने की तरह हवा मे उच्छल रही थी. मेरी हवा मे उच्छलती चुचिया कई
बार मेरी खुद की ठुड्डी से टकराई. मैं तो बस पहुँचने ही वाली थी और मेरा
नंगा बदन झड़ने के लिए अकड़ने लगा. उनका लॉडा भी हर धक्के के साथ सख़्त,
और सख़्त होता जा रहा था.

मैं खुद को रोक नही सकी और करीब करीब चिल्लाई - ओह डियर........ मैं तो गई जानू.

वो बोले - रूको जूली........... मैं भी आया.

हम दोनो प्यार और चुदाई के मज़े और उत्तेजना मे बड़बड़ाने लगे.

" लव यू डियर........ ओह डार्लिंग........... जानू......... जान.....
आआहह .... ऊऊहह ...... हाआअन्न्‍ननणणन्."

अचानक, मैं झाड़ गई और मैने अपने आप को स्वर्ग मे महसूस किया. मेरे हाथ
उनकी गर्दन पर कस गये पर नीचे उनके लंड के तूफ़ानी धक्के मेरी चूत मे
लगातार जारी थे. मुझे पता था कि वो भी जल्दी ही झड़ने वाले हैं. मैं भी
उनको चुदाई की मंज़िल पर पहुँचने मे पूरा साथ दे रही थी. करीब 10 धक्कों
के बाद, उन्होने मेरी नंगी गंद को पकड़ कर अपने लंड पर भींच लिया और उनका
लंड मेरी चूत मे अपना लंड रस बरसाने लगा. उनका लंड किसी पंप की तरह अपना
पानी मेरी चूत की गहराइयों मे नाचता हुआ फेंक रहा था. उन के लंड का इस
तरह नाच नाच कर पानी निकालना मुझे बहुत पसंद है. हम दोनो इसी तरह झड़ने
का मज़ा ले रहे थे और किसी तरह उन्होने मेरी लटकती चुचि को अपने मूह मे
भर लिया और चूसने लगे. मेरे पति को ये अच्छी तरह पता है कि चुदाई मे
ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा कैसे लिया जाता है और कैसे दिया जाता है. अपने
लंड के पानी की मेरी चूत के अंदर अंतिम बौच्हर करके उन्होने मुझे नीचे
उतारा. उनका लंड मेरी चूत से बाहर आ चुका था. मैने देखा की उनका लंड पूरी
तरह गीला था, उनके खुद के लंड से निकले रस से और मेरी चूत के रस से.
फव्वारे से बरसता पानी उनके लंड को सॉफ करने लगा और मेरी चूत से उनका
छ्चोड़ा गया पानी भी मेरे चूत रस के साथ बाहर आने लगा था.

बाथरूम मे, फिर एक बार हमारे बीच एक शानदार चुदाई संपन्न हुई, इस बार तो
मैं चुदाई के समय उनके हाथों मे लटकी हुई थी.

उन्होने मेरी चूत पर शॅमपू लगा कर सॉफ किया और मैने उनके लंड को साबुन
लगा कर सॉफ किया.

अपना अपना नंगा बदन पूंछ कर हम दोनो ही नंगे बाथरूम से बेडरूम मे पार्टी
मे जाने के लिए तय्यार होने को आए.

मेरे पति बोले - डार्लिंग ! एक कप चाइ मिलेगी ?

मैने उत्तर दिया - क्यों नही डियर ! मैं ज़रा गाउन पहन लूँ.

वो बोले - नही जानू. तुम जानती हो कि कपड़े तुम्हारे जिस्म पर अच्छे नहीं
लगते जब हम दोनो घर मे अकेले होते है.

मैं बस इतना ही कह सकी - शरारती कहीं के.

और हम दोनो ही हंस पड़े. मैं चाइ बनाने के लिए किचन मे जाने को घूमी. मैं
पूरी तरह नंगी थी और मेरे पति भी पूरे नंगे थे. हम दोनो को ही एक दूसरे
का नंगा बदन बहुत पसंद है. अब उनका लॉडा शांत था और आराम से जैसे उनकी
गोलियों की थैली पर बैठा हुआ था. मैं रसोई मे नंगी खड़ी हो कर चाइ बना
रही थी और वो बाहर के कमरे मे सोफा पर नंगे बैठ कर टी.वी. देखने लगे.
बाहर का कमरा कुछ इस पोज़िशन मे था की अगर रसोई का दरवाजा खुला हो तो एक
कोने से रसोई मे बाहर के कमरे से देखा जा सकता है. मैने रसोई मे खड़े
खड़े उनको बाहर के कमरे मे बैठा हुआ देखा जबकि चाइ उबल रही थी. मुझे फिर
एक बार अपने चुड़क्कड़ पति और मेरी पसंद पर गर्व महसूस हुआ. एक बहुत ही
अच्छे इंसान, हमेशा दूसरों का ध्यान रखने वाले, सुंदर, गोरे रंग के, लंबे
कद के और मजबूत कसरती बदन के मालिक, और सब से उपर ये की चुदाई के मामले
मे एक बहुत ही मज़बूत मर्द, ऐसे है मेरे पति. उनके पास एक शानदार, लंबा
और मोटा लॉडा है जिसकी मैं दीवानी हूँ. मैं अपने आप को दुनिया की सबसे
खुसकिस्मत औरत मानती हूँ जिसके पास दुनिया का सबसे अच्छा पति है.

चाइ ले कर मैं बाहरी कमरे मे आई और चाइ की ट्रे को टेबल पर रखा. उन्होने
मुझे मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और मुझे अपनी नंगी गोद मे बिठा
लिया. उन्होने मुझे मेरे होठों पर चूमा और उनके हाथ मेरी नंगी पीठ सहलाने
लगे. उनके गरमा गरम चुंबन से मैं फिर से गरम होने लगी. मैने अपनी नंगी
गंद के नीचे, उनके पैरों के बीच कुछ हलचल महसूस की. मैं झट से खड़ी हो गई
और देखा की उनका लंड फिर से खड़ा होने लग गया है. ऐसा लग रहा था जैसे
लंबे गुब्बारे मे हवा भर रही हो.

मैने मुस्कराते हुए कहा - हम को पार्टी मे जाने के लिए तय्यार होना है. ठीक?

वो बोले - हां. तुम ठीक कहती हो, पर पार्टी हमारा थोड़ा इंतज़ार कर सकती
है. एक छ्होटी सी, फटाफट चुदाई के बारे मे क्या ख़याल है?

मैने उत्तर दिया - मैं तय्यार हूँ. पर हम को पार्टी मे जाने मे देर हो जाएगी.

उन्होने एक लंबी साँस ली और बोले - ठीक है मेरी रानी. ये तो हमारा खेल है
और हम इसको चाहें जब, चाहे जहाँ खेल सकतें हैं. कोई बात नही, पार्टी के
बाद सही.
क्रमशः.........................

chudaai Ka Dusara Roop--1

Main apne pati ke paas delhi aa gai thi Goa me 15 din rahne ke baad.
Goa me rahte huye maine Anju ke sath lesbian sex ka khel khela tha.
Mere bahut se chahne walon ne apni mail me likha hai ki chudai me
asantusht aurat ko chod kar santusht karna ek samaj seva hai. Main to
hamesha hi chudai aur chudai ko pyar karne walon ko pyar karti hun.

Main aur mere pati abhi abhi South Africa me football ka world cup
dekh kar lauten hain. Hamara South Africa ka daura aur match ke
tickets mere pati ko unki office ki taraf se hamari shadi ka tohfa
tha.

Apne South Africa me hone ke dauraan main apne chahne walon ko ye
nahin bata paayi ki wahan jaane se pahle kya kya hua tha. Ab maine
socha hai ki aap ko silsilewaar sab bataun.

To....... baat wahan se shuru karti hun jahan par ham meri pichhli
kahani me the.

Main 10 din Goa me bitane ke baad apne pati ke paas wapas Delhi aa gai
thi. Goa me mera jyadatar samay mere sasuraal me hi beeta tha. Wahan
mujhe Anju ke sath jyada chudai ka mauka nahin mila tha par us dauraan
hamne milkar aur do baar lesbian chudai ki thi jab hamko mauka mila
tha. Anju bahut khush thi, ye maine uske chehre par saaf saaf dekha.
Mujhe Anju ke baare me soch kar bahut dukh hota hai. Wo jawan hai,
bahut khoobsurat hai par uska pati usko chod kar santusht nahin kar
paata. Khair....... ye to kismat ki baat hai.

Goa se wapas aane ke baad, ek sham ko main mere pati ka intzaar kar
rahi thi kyon ki hamko unke ek dost ki shadi ki saalgirah ki party me
jaana tha. Main jaan boojh kar tayyar nahin hui thi kyon ki main
jaanti thi ki mere pati tayyar hone ke liye, shayad mere sath hi sham
ka snaan karna pasand karenge. Jyadatar ham sath sath hi nahate hain.
Main sirf ek gown pahne huye thi jiske andar maine kuch bhi nahi pahna
tha. Main jaanti hun ki mere pati mujhe aise dekhna pasand karten hai.
main batana chahti hun ki ham dono hi ghar me chahe jaise rah sakte
hain kyon ki yahan hamare sath koi teesra nahin rahta hai, Sirf main
aur mere pati. Khidkiyon par parde aur gahre rang ke sheeshe hone ki
wajah se ham ghar me jaise chahe rah sakten hain, jo chahe kar sakten
hai. Bahar se kisi ka bhi hamko dekh paana sambhav nahin hai. Ham ek 9
manzil ki imaarat ki teesri manzil par rahten hain.

Mere pati apne paas ki chabi se darwaja khol kar ghar me aaye to mujhe
turant hi pata chal gaya kyon ki main bahri kamre me hi baith kar T.V.
dekh rahi thi. Unki tej aankhon ne turant hi bhaamp liya ki main unke
sath nahane ko tayyar hun. Wo muskraaye to jawab me main bhi muskaraa
padi. Wo mere najdeek aaye aur mujhe apni baahon me bhar liya, jo ki
wo hamesha hi ghar aate hi karten hain. Maine bhi unko baahon me bhara
aur hamne ek dusre ke rasile honth chuste huye chumban kiya.

Wo bole - Tayyar ho nahane ke liye ?

Maine kaha - Haan jaan. Main tayyar hun.

Unhone jawab diya - Thik hai. Ek glass paani milega peene ke liye ?

Main rasoi se unke liye paani ka glass le kar aayi to maine dekha ki
unhone apne saare kapde utaar diye hain aur sirf chaddi pahne sofa par
baithe hain. Jab maine unko paani ka glass diya to unhone apne ek hath
se paani ka glass pakda aur dusre hath se mera hath pakad kar mujhe
apni god me bitha liya. Unhone paani piya aur phir se mere hothon ko
chuma. Main unke chumban ka anand leti hui unke baalon me hath phira
rahi thi. Pyar aur chudai ki aag hamare beech bhadkni shuru ho chuki
thi.

Yahan main aap ko phir se batadun ki main pichhle 15 saalon se chudwa
rahi hun jab main sirf 14 saal ki thi tab se. Ab meri shadi ko 7
mahine ho chuke hain. Shadi ke pahle main saptaah me 4 ya 5 baar
chudwati thi aur ab shadi hone ke baad chudwane ki ginti badh kar din
me kam se kam do baar ho gai hai. Sabse jyada khushi ki baat to ye hai
ki hamesha hi, jab bhi akele hoten hain, ek dusre ko chhute hain,
chumban karten hain, maine paaya hai ki chudai ki garmi wahi purani
garmi jaisi hai. Main bahut kismat wali hun ki mujhe mere jaisa hi
chudai ka sathi mila hai.

Hamara chumban khatam hone ke baad unhone mujhe kisi gudia ki tarah
apne hathon me uthaya aur mujhe bathroom me le aaye. Us samay 6.30
huye the aur hamare paas party me jaane ke pahle kafi samay tha.
Unhone fawwara chalu kiya aur ham dono bheegne lage. Maine apna geela
gown utaar kar apne sexy badan ko kapde se aazaad kiya. Garmi ka
mausam aur fawware ka thanda thanda paani. Lekin wo thanda paani bhi
hamari chudai ki garmi ko kam nahi kar raha tha, balki aur badha raha
tha. Maine unki chaddi bhi utaar di aur dekha ki unka khada hua lamba
lauda mujhe salam kar raha tha. Maine dekha ki unke lund ke aas paas
kuch baal ug aaye hain. Meri chut to bilkul saaf, bina baalone ke,
chikni thi kyon ki maine to do din pahle hi apni chut ke baal saaf
kiye the. Maine unke khade huye, sakht, lambe aur mote lund lo apne
hath me pakda. Unke lund ke neeche latki goliyon ki thaili par se hota
hua paani neeche gir raha tha.

Mere pati ko pata hai ki mujhe chut ya lund par baal pasand naji hai,
khas kar ke mukh maithoon karte waqt. Wo turant samajh gaye ki meri
aankhon ne kya dekha hai. Unhone turant neeche ke baal saaf karne wala
saamaan bathroom ki chhoti aalmari se nikaala. Main fawware ke neeche
baithi unko dekh rahi thi jabki wo fawware ke baraste paani se bahar
chale gaye. Unhone apne khade lund ke aas paas, jahan jahan baal the,
aur lund ke neeche latki goliyon ki thaili par bhi thodi shaving cream
lagai. Hamesh ki tarah maine unko apni jhaanten saaf karne me madad ki
kyon ki mujhe ye kaam pasand hai. Jab wo razor se apne baal saaf kar
rahe the to maine unka lund pakad rakha tha aur maine unke lund ke
neeche ki goliyon ki thaili ko bhi idhar udhar kar ke wahan se baal
saaf karne me unki madad ki. Jaldi hi unka sundar lund bina baalon ke,
chikna ho kar meri aankhon ke saamne tha. Ab wo bhi fawware ke neeche
aa gaye the aur unke laude ke aas paas lagi sabun paani me bah gai aur
unka lund chamak utha. Maine bina koi samay barbaad kiye turant hi
neeche baithe baithe unka pyara sa, khada hua, sakht, lamba aur mota
lund chusne ke liye apne muh me le liya. Wo khade the aur unke hath
mere sir ke baalon me pyar se ghumne lage jabki main bathroom ke farsh
par baith kar unke lund ko chus rahi thi. Aap ko mere pati ki
mardaangi maalum hi hai ki unke lund se paani nikalne me kafi waqt
lagta hai aur jyadatar unki ek chudai me meri do chudai ho jaati hai.
Unki ye mardaangi ham dono ke liye bade garv ki baat hai. Ab mujhe
unko apne hath aur muh se hi itna garam karna tha aur itna aage le
jaana tha ki chodte waqt unke lund se mere khud ke jhadne ke sath hi
paani nikle. Fawware se barasta paani ham ko aur bhi sexy bana raha
tha. Un ke lund ka muh mere muh me tha aur nichla hissa mere hath me
tha. Meri jeebh unke lund ke muh, supade par ghum rahi thi jo unko
poora maza de rahi thi. Wo hamesha kahten hain ki main bahut achha
lund chusti aur chaat ti hun. Main khud jaanti hun ki main kitni
kaabliyat ke sath lund chusti hun. Main unka lund apni hatheli me
pakad kar aage peeche karte huye unke lund ka supada chus rahi thi.
Unka lund chuste aur muth maarte huye mujhe ye andaaza ho gaya tha ki
main unko aadhi door le aayi hun aur ab ham apna pasadeeda chudai ka
khel shuru kar sakten hain. Mere chut to unka lund chuste chuste hi
kafi geeli ho chuki thi aur unka lund lene ko tayyar thi.

Ham dono paani barsaate fawware ke neeche aamne saamne khade the. Meri
chuchiyon aur meri nipples par se hota hua fawware ka paani bah raha
tha. Unhone meri geeli chuchiyon ko, geeli nipples ko bahut hi pyar se
chusa.

Ham dono ko hi hamesha alag alag position me chudai karna pasand hai.
Unhone apne hath mere peeche karte huye mujhe meri nangi gand pakad
kar utha liya. Main jaise unki hatheliyon par apni gand tika kar
baithi thi. Main chudwane ke liye tayyar thi aur meri chut bhi unke
lund ka swagat karne ko tayyar thi. Kyon ki main unke dono hath par
apni gand rakh kar baithi thi aur wo khade the, maine apna hath neeche
karke, unke intzaar karte huye garam laude ko pakad kar apni chut ke
darwaje par lagaya aur unhone meri gand jara dabai to unka fanfanata
hua lund meri chut me ghusne laga. Chudai ki is position me mere liye
jyada kuch karne ko nahi tha siway chudwane ke. Wo meri gand pakde
huye the aur mujhe upar neeche, upar neeche kar rahe the. Mere hath
unki gardan par lipte huye the. Hamesha ki tarah unka lamba lund meri
chut ki gaharaaiyon me maza dene wale sthaan ko khat khata raha tha.
Wo meri gand pakad kar mujhe chod rahe the aur main apni gand unke
hath me rakh kar maze se chudwa rahi thi. Fawware ke baraste paani ke
neeche jo jawan nange jism jal rahe the aur apni chudai ki garmi ko
kam karne ki koshish kar rahe the. Bahte paani me bhi chudai ki facha
fach .. facha fach........ faka fak...... faka fak ho rahi thi. Ek
baar phir mujhe laga ki main unse kahin pahle hi jhad jaaongi. Main
apne poore anubhav aur kaabliyat ke sath is tarah chudwa rahi thi ki
unko bharpoor maza mujhko chodne me aaye. Ab unki chodne ki raftaar
badh gai thi aur unka lund teji se aur jaldi jaldi meri geeli chut me
andar bahar ho raha tha. Hamari aankhen chudai ke anand ke maare band
hui jaa rahi thi. Chudai ka poora daaromdaar un par tha aur wo meri
nangi gand pakad kar dhakke laga rahe the. Main jordaar chudai ka
poora maza le rahi thi. Unke land ke, meri chut me har dhakke ke sath
meri chuchiyan uchhal rahi thi. Wo mujhe kisi gudiya ki tarah apne
haathon me utaye bathroom me baraste paani ke neeche chod rahe the.
Mujhe unke tej hote dhakkon, unke lund ke meri chut me aate jaate aur
adhik sakht hone se ye pata chal chuka tha ki jaldi hi unka lund meri
chut me apna lund ras barsaane wala hai. Main to pahle se hi apne
jhadne ke kafi kareeb thi. Achanak hi unki chudai ki raftaar toofani
ho gai aur main unke haathon me kisi khilone ki tarah hawa me uchhal
rahi thi. Meri hawa me uchhalti chuchiya kai baar meri khud ki thuddi
se takraai. Main to bas pahunchne hi wali thi aur mera nanga baban
jhadne ke liye akadne laga. Unka lauda bhi har dhakke ke sath sakht,
aur sakht hota jaa raha tha.

Main khud ko rok nahi saki aur kareeb kareeb chillai - Oh dear........
Main to gai jaanu.

Wo bole - Ruko Julee........... main bhi aaya.

Ham dono pyar aur chudai ke maze aur uttejna me badbadane lage.

" Love you dear........ Oh darling........... jaanu......... jaan.....
Aaaahhhhh .... Oooohhhhhhh ...... Haaaaannnnnnn."

Achanak, main jhad gai aur maine apne aap ko swarg me mahsoos kiya.
Mere hath unki gardan par kas gaye par neeche unke lund ke toofani
dhakke meri chut me lagataar jaari the. Mujhe pata tha ki wo bhi jaldi
hi jhadne wale hain. Main bhi unko chudai ki manzil par pahunchane me
poora sath de rahi thi. Kareeb 10 dhakkon ke baad, unhone meri nangi
gand ko pakad kar apne lund par bheench liya aur unka lund meri chut
me apna lund ras barsaane laga. Unka lund kisi pump ki tarah apna
paani meri chut ki gahraaiyon me naachta hua phenk raha tha. Un ke
lund ka is tarah naach naach kar paani nikaalna mujhe bahut pasand
hai. Ham dono isi tarah jhadne ka maza le rahe the aur kisi tarah
unhone meri latakti chuchi ko apne muh me bhar liya aur chusne lage.
Mere pati ko ye achhi tarah pata hai ki chudai me jyada se jyada maza
kaise liya jaata hai aur kaise diya jaata hai. Apne lund ke paani ki
meri chut ke andar antim bauchhar karke unhone mujhe neeche utaara.
Unka lund meri chut se bahar aa chuka tha. Maine dekha ki unka lund
poori tarah geela tha, unke khud ke lund se nikle ras se aur meri chut
ke ras se. Fawware se barasta paani unke lund ko saaf karne laga aur
meri chut se unka chhoda gaya paani bhi mere chut ras ke sath bahar
aane laga tha.

Bathroom me, phir ek baar hamare beech ek shandaar chudai sampann hui,
is baar to main chudai ke samay unke haathon me latki hui thi.

Unhone meri chut par shampoo laga kar saaf kiya aur maine unke lund
ko sabun laga kar saaf kiya.

Apna apna nanga badan poonch kar ham dono hi nange bathroom se bedroom
me party me jaane ke liye tayyar hone ko aaye.

Mere pati bole - Darling ! Ek cup chai milegi ?

Maine uttar diya - Kyon nahi dear ! Main jara gown pahan lun.

Wo bole - Nahi jaanu. Tum jaanti ho ki kapde tumhare jism par achhe
nahin lagte jab ham dono ghar me akele hoten hai.

Main bas itna hi kah saki - Sharaarti kahin ke.

Aur ham dono hi hans pade. Main chai banane ke liye kitchen me jaane
ko ghumi. Main poori tarah nangi thi aur mere pati bhi poore nange
the. Ham dono ko hi ek dusre ka nanga badan bahut pasand hai. Ab unka
lauda shant tha aur aaraam se jaise unki goliyon ki thaili par baitha
hua tha. Main rasoi me nangi khadi ho kar chai bana rahi thi aur wo
bahar ke kamre me sofa par nange baith kar T.V. dekhne lage. Bahar ka
kamra kuch is position me tha ki agar rasoi ka darwaja khula ho to ek
kone se rasoi me bahar ke kamre se dekha jaa sakta hai. Maine rasoi me
khade khade unko bahar ke kamre me baitha hua dekha jabki chai ubal
rahi thi. Mujhe phir ek baar apne chudakkad pati aur meri pasand par
garv mahsoos hua. Ek bahut hi achhe insaan, hamesha dusron ka dhayan
rakhne wale, sundar, gore rang ke, lambe kad ke aur majboot kasarti
badan ke maalik, aur sab se upar ye ki chudai ke maamle me ek bahut hi
mazboot mard, aise hai mere pati. Unke paas ek shandaar, lamba aur
mota lauda hai jiski main deewani hun. Main apne aap ko duniya ki
sabse khuskismat aurat maanti hun jiske paas duniya ka sabse achha
pati hai.

Chai le kar main bahri kamre me aayi aur chai ki tray ko table par
rakha. Unhone mujhe mera hath pakad kar apni taraf kheencha aur mujhe
apni nangi god me bitha liya. Unhone mujhe mere hothon par chuma aur
unke hath meri nangi peeth sahlaane lage. Unke garma garam chumban se
main phir se garam hone lagi. Maine apni nangi gand ke neeche, unke
pairon ke beech kuch halchal mahsoos ki. Main jhat se khadi ho gai aur
dekha ki unka lund phir se khada hone lag gaya hai. Aisa lag raha tha
jaise lambe gubbare me hawa bhar rahi ho.

Maine muskaraate huye kaha - Ham ko party me jaane ke liye tayyar hona
hai. Thik?

Wo bole - Haan. Tum thik kahti ho, par party hamara thoda intzaar kar
sakti hai. Ek chhoti si, fatafat chudai ke baare me kya khayal hai?

Maine uttar diya - Main tayyar hun. Par ham ko party me jaane me der ho jaayegi.

Unhone ek lambi saans li aur bole - Thik hai meri rani. Ye to hamara
khel hai aur ham isko chahen jab, chahe jahan khel sakten hain. Koi
baat nahi, party ke baad sahi.
kramashah.........................


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