Thursday, February 7, 2013

बहन के साथ डिस्को बार से बेडरूम तक-2

हिंदी सेक्सी कहानियाँ

बहन के साथ डिस्को बार से बेडरूम तक-2

gataank aage..................
अचानक कविता ने मेरा हाथ परे हटा दिया और मुझ से कान में हाँफते हुए
बोली, चलो भय्या घर चलते हैं। मैं भी अब तक उसकी पूरी चुदाई के मूड में
था। इसलिए तुरंत राज़ी हो गया। हमने बिल पे किया और कविता फिर वाश रूम में
जाकर पूरे कपड़े पहन कर वापस आ गई। मैंने डिस्को से बाहर आ कर बाइक
स्टार्ट की और घर की ओर चल पड़ा। रास्ते में मैंने बीयर की दो बोतलें और
कोंडोम का पैकेट खरीद लिया। मेरे बहन मेरे से चिपक कर बाइक पर बैठ गई
जिससे मेरे लंड में उबाल आ गया था। घर जाते ही मैंने डोर बंद कर दिया और
अपनी बहन को बेतहाशा चूमने लगा। कविता पागलों की तरह मुझे यहा वहाँ चूमने
लगी। हम दोनों का बुरा हाल था।

कविता: हाय भैया, बहुत मज़ा आ रहा है।

मैं (उसे चूमते हुए): मेरे जान, तू पहले कहाँ थी। मुझे पहले क्यों नहीं
मिली इस तरह?

कविता: मैं तो यहीं थी भय्या पर आपने मुझे इस तरह से कभी देखा ही नहीं।

मैंने अपने दोनों हाथ उसके बूब्स पर रख दिए और उन्हें दबाने लगा।

कविता: आह भय्या जरा धीरे से दबाओ।

मैं: क्या करूँ यार तुझे देख कर कंट्रोल ही नहीं होता।

मैंने फिर कविता के टॉप की जीप आगे से खोल दी और उसकी शमीज़ और ब्रा के
ऊपर से उसके दूध मुंह में लेकर चूमने लगा। कविता नें मेरे सर को ज़ोर से
अपनी चूचियों पर दबा लिया और मुंह से कामुक आवाजें निकालने लगी।

मैंने उसकी शमीज़ और स्कर्ट भी उतार दी। अब मेरे बहन ब्रा और पैंटी में
मेरे सामने थी। ओह माइ गॉड मेरा तो उसे देख कर बुरा हाल था।

मैं आगे बढ़ा. पर कविता बोली, बस भय्या. अब यहीं रुक जाते हैं.

मैं: क्यों?

कविता (मुझे समझाते हुए): क्योंकि हम भाई बहन हैं. हमारे प्यार की एक
सीमा है. बस यहाँ से आगे नहीं.

मैं (कसमसाते हुए): तेरे में गज़ब का कंट्रोल है. पर मुझ से कण्ट्रोल नहीं
होता. आयी वांट टू फक यू.

कविता (मुस्कुराते हुए): बट यू टच मी नॉट.

मैं: तेरी तो. मैं तुझे आज नहीं छोडूंगा. चाहे कुछ भी हो जाए तुझे चोद के रहूँगा.

मैं आगे बढ़ा. कविता पीछे हट गयी. जैसे ही मैंने उसे पकड़ना चाह, वो मुझ से
छूट कर भाग गयी. मैं भी उसके पीछे पीछे भागा. आखिर मैंने से पकड़ ही लिया
और गोद में उठा लिया. कविता मेरी बाहों में मचल रही थी और बार बार "भय्या
प्लीज़ छोड़ दो" कह रही थी. पर मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ा. मैंने उसे बेड पर
पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. मैं उसके बूब्स मसलने लगा और लिप्स पर किस
करने लगा. कविता हांफने लगी. मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में घुसा दिया और
एक उंगली उसकी चूत में घुसेड़ दी. कविता बुरी तरह से उत्तेजित हो गयी. कुछ
ही देर में कविता का विरोध समाप्त हो गया और वो मस्ती से मेरा साथ देने
लगी. उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी. यह देख कर मैं निश्चिन्त हो गया और
उसके ऊपर से उठा. मैंने दो ग्लास बीयर के बनाए और एक अपनी बहना की तरफ
बढ़ा दिया.

मैं बोला: पी मेरी जान. आज की चुदाई के नाम पर पी ले. आज मैं बहन चोद
बनना चाहता हूँ. तेरी जवानी ने मुझे पागल कर दिया है. आज हम भाई बहन के
रिश्ते तो एक नया मोड़ देंगे.

कविता नें मुझे शोख निगाहों से देखा और मुस्कुराते हुए जाम पकड़ लिया. वो
धीरे धीरे बीयर पीने लगी. मैं बीयर पीते पीते बीच बीच में उसके कभी बूब्स
मसल देता जांघें सहलाने लगता और कभी चूत में उंगली करने लगता. मेरी बहन
अब कोई विरोध नहीं कर रही थी. बल्कि सिसकियाँ ले ले कर, कामुक आवाजें
निकाल कर मेरा हौसला बढ़ा रही थी.


कविता (शर्माते हुए): भय्या अपने कपड़े भी उतारो ना।

मैंने उसे बाहों में भर कर चूमते हुए कहा, तू खुद ही उतार दे मेरे रानी।

कविता नें मेरी टी शर्ट उतार दी और जींस की पेंट का बटन खोलने लगी। मेरे
देखते देखते उसने मेरे जींस नीचे कर दी। मैंने भी तुरंत अपनी जींस उतार
कर दूर फेंक दी और उससे चिपट गया। मैं अब अपनी सगी बहना के सामने सिर्फ
अंडर वीयर में था। मेरा तना हुआ लंड मेरे अंडर वीयर से बाहर आने को मचल
रहा था। कविता नें मेरा लंड मेरे अंडर वीयर के ऊपर से पकड़ लिया और उसे
सहलाने लगी जिससे मैं बहुत उत्तेजित हो गया।

कविता: क्या मस्त है भय्या आपका। मैंने आज तक किसी लड़के का नहीं देखा।
प्लीज़ इसे दिखाओ ना।

मैं: पहले मैं तुझे नंगी देखना चाहता हूँ। देखूँ तो मेरे प्यारी बहना
नंगी कैसी दिखती है?

ये कह कर मैंने तुरंत कविता की ब्रा को खोल दिया। ओह माइ गॉड क्या नज़ारा
था। उसके संतरे के साइज़ के गोरे गोरे दूध देख कर मैं तो जैसे पागल हो
गया। मैं बड़े मज़े से उसके निप्पल चूसने लगा। उसे दीवार से सटा कर मेरा एक
हाथ उसका दूध दबा रहा था और दूसरा हाथ नीचे पैंटी के बाहर से उसकी चूत
सहला रहा था। कविता की पैंटी गीली हो चुकी थी और वो ज़ोर ज़ोर से
सिसकारियाँ भर रही थी। मैंने एक झटके में उसकी पैंटी नीचे कर दी और उसे
उतार कर दूर फेंक दिया। अब मेरे प्यारी कमसिन बहना पूरी तरह से नंगी मेरे
सामने खड़ी थी। मैंने बड़े प्यार से उसे बेड पे लिटा दिया। कविता की गोरी
चिट्टी बिना बालों की अनछुई चूत मेरे सामने थी। उसकी चूत बहुत कसी हुई थी
और साइज़ में बहुत छोटी थी। मैंने उसकी चूत की फाँकों को अलग किया और नीचे
झुक कर उसके अंदर देखने लगा। मेरे बहना की कुंवारी चूत अंदर से गुलाबी
रंग की थी। मैंने एक उंगली उसकी पहले से ही गीली चूत में डाल दी और धीरे
धीरे अंदर बाहर करने लगा। कविता उत्तेजना में मुंह से कामुक आवाजें
निकालने लगी। मैंने तुरंत अपना फनफनाता हुआ लन्ड अपने अंडर वीयर से आज़ाद
कर दिया और उसकी चूत पर रगड़ने लगा। कविता के दोनों बूब्स मेरे हाथों से
दब रहे थे और वो ज़ोर ज़ोर से आहें भर रही थी। मेरे जीभ उसके मुंह में अंदर
तक गई हुयी थी और उसे मैं भरपूर किस कर रहा था। अब मेरे लन्ड से वीर्य
निकालने वाला था। तब मैं रुक गया। अपनी बहना के नंगे बदन को चूमते हुए
मैं नीचे की तरफ बढ़ा। फिर मैंने अपनी जीभ कविता की नन्ही सी चूत में घुसा
दी और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत चाटने लगा। कविता उत्तेजना से सर इधर उधर पटक
रही थी। मेरे देखते देखते कविता मेरे मुंह में ही झड़ गई। मैंने अपनी
प्यारी बहना की चूत का रस पहली बार पिया।

अब मैंने उठ कर बीयर के दो ग्लास बनाए और एक अपनी प्यारी बहना के मुंह से
लगा कर बोला: इसे पीले मेरी जान। तब मैं तुझे बड़े प्यार से चोदूंगा।

कविता उठ कर बीयर पीने लगी। उसने म्यूज़िक सिस्टम ऑन कर दिया और थिरक थिरक
कर नाचने लगी। मैं बैठ कर मज़े से अपनी सगी बहना को नंगी नाचते हुए देखने
लगा और बीयर पीने लगा। नाचते हुए कविता अपने बूब्स दबा रही थी और कामुकता
से मुझे इशारे करने लगी। मैं बेड पर बैठा हुआ था। कविता मेरे सामने आ कर
घुटनों के बल बैठ गई और बड़े अंदाज़ से मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी।
मेरा लंड बुरी तरह से अकड़ा हुआ था। मैंने अपना लंड उसके मुंह के आगे कर
दिया और उसके होंठों पर फेरने लगा। फिर मैंने अपनी बहन के बाल पकड़े और एक
हाथ से अपना लंड पकड़ कर एक झटके से उसके मुंह में घुसा दिया और बोला: इसे
चूस मेरी जान। मेरी बहना नें बड़े प्यार से मेरे लंड का सुपाड़ा अपने मुंह
में ले लिया और उसे चूसने लगी। बीच बीच में वो मेरी बाल्स को भी चूसने
लगी। लंड चूसते हुए उसका गोरा मुखड़ा उतेजना से लाल हो गया था। मैं बड़े
प्यार से उसकी जुल्फें हटा रहा था जो बार बार मेरे लंड को चूसते हुए उसके
सुंदर और सलोने मुखड़े के सामने आ जाती थीं। मेरे मुंह से कामुक आवाजें
निकलने लगीं।

मैं: कैसा लग रहा है?

कविता: हाय भैया बड़ा मज़ा आ रहा है। देखो ना ये कितना बड़ा है, और कितना प्यारा है।

मैं (बड़े प्यार से सर पे हाथ फेरते हुए): इसको लंड कहते हैं।

कविता (मेरा लंड चाटते हुए): हाँ भय्या, आपका लंड बहुत सुंदर और बड़ा है।
मैंने ज़िंदगी में पहली बार लंड देखा है। अब ये मेरा है। मैं इसे जब जी
चाहे चुसुंगी। और चूसने दोगे?

मैं: हाँ मेरे प्यारी बहना, चूस अपने भय्या के लंड को। देख ये कितने
दिनों से अपनी बहन के मुंह में जाने के लिए तरस रहा था।

कविता अब बड़े ज़ोर शोर से मेरा लंड चूसने लगी और थोड़ी ही देर में मैं उसके
मुंह में झड़ गया। कविता नें मेरे वीर्य को पी लिया और चाट चाट कर मेरा
लंड साफ कर दिया। मैंने थोड़ी सी बीयर अपने लंड पर गिरा दी। कविता मेरे
लंड को चूस चूस कर बीयर पीने लगी और मेरे लंड से खेलने लगी। थोड़ी ही देर
में मेरा लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया। कविता उठ कर सीडी बदलने चली गई।
मैं पीछे से उसके गोरे गोरे नंगे चूतड़ देख कर पागल सा हो गया। उसके घने
लंबे बाल उसकी कमर पे लहरा रहे थे। वो मटक मटक कर चल रही थी और उसके नंगे
चूतड़ ऊपर नीचे हो रहे थे।

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उठ कर अपने बहना के नाज़ुक बदन को अपनी बाहों
में भर लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा। अब मैंने बड़े ध्यान से अपने बहन
की चूचियों को देखा। उसकी गोरी गोरी संतरे के साइज़ की चुचियाँ और गुलाबी
निप्पल देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया। मैं बड़ी मस्ती से अपनी प्यारी
बहना के निपप्ल बारी बारी से चूसने लगा। कविता सिसकारते हुए दोनों हाथों
से मेरे सर को अपनी छाती से दबा रही थी। मेरा एक हाथ उसकी चूत सहला रहा
था। अब मैं अपने लन्ड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा और बोला: अब मैं तुझे
चोदूँगा मेरी जान। बोल, लेगी अपने भय्या का लन्ड अपनी चूत में?

कविता सिसकते हुए: हाँ भय्या, डाल दो अपनी प्यारी बहना की चूत में अपना
लन्ड। मैं तो कब से तरस रही हूँ। क्यों तड़पा रहे हो अपनी बहन को? अब आ
जाओ और मुझे चोद दो। मेरी चूत अभी तक कुंवारी है भय्या और ये सिर्फ आपके
लिए है।

फिर मैंने कविता की एक टांग ऊपर उठाई और अपना लन्ड उसकी चूत के मुहाने पे
रख दिया। कविता नें आँखें बंद कर लीं। मैंने थोड़ा सा धक्का दिया, मेरा
लन्ड फिसल कर थोड़ा सा अंदर चला गया। कविता की चूत पहले से ही काफी चिकनी
थी पर फिर भी उसके मुंह से हल्की सी कराह निकली। मैंने एक और धक्का दिया
और मेरा लन्ड आधा उसकी चूत में चला गया। कविता ज़ोर से चिल्ला उठी और
बोली, भय्या बाहर निकालो, बहुत दर्द हो रहा है।

मैं: चिंता मत कर। शुरू शुरू में हर लड़की को दर्द होता है। बाद में तुझे
बहुत मज़ा आएगा।

कविता चुप हो गई। मैं धीरे धीरे अपना लन्ड उसकी चूत में अंदर बाहर करने
लगा। साथ में मैं उसके बूब्स चूसता रहा और लिप्स पर किस करता रहा जिससे
कविता को भी मज़ा आने लगा। अब कविता बड़े मज़े से मुझ से चुदवाने लगी। वो
मेरे हर धक्के पर चूतडों को आगे हिला कर मेरा साथ दे रही थी। हम दोनों
भाई बहन लय ताल से चुदाई का आनंद ले रहे थे। तभी मुझे ध्यान आया कि मैं
कोंडोम तो लगाना भूल ही गया था। मैं थोड़ी देर रुका और कोंडोम ले कर आया।
तब तक कविता नें बीयर का ग्लास खत्म किया और मैंने भी एक ग्लास बीयर पी
ली। कविता बेड पर चित होकर लेट गई। उसकी दोनों टांगें खुली हुई थीं और
उसकी गुलाबी चूत मुझे बुलावा दे रही थी कि आओ भय्या अपनी बहना की सील तोड़
कर उसे अपनी बना लो। मैं कोंडोम पहन कर उसकी दोनों टांगों के बीच बैठ गया
और एक हाथ से अपना लन्ड लेकर उसकी नाज़ुक सी चूत में घुसा दिया। कविता का
सेक्स के इस आनंद से बुरा हाल था। मैं फिर से शुरू हो गया और धमाधम अपनी
नन्ही बहना को चोदने लगा। मेरा लन्ड पिस्टन की तरह उसकी चूत में अंदर
बाहर हो रहा था।

कविता उत्तेजना से बड़बड़ा रही थी: हाय भय्या, ज़ोर से करो, और तेज़, मज़ा आ
गया, आह......मेरा निकलने वाला है भय्या........ऐसे ही करते रहो.......ओह
माई गॉड.....

मैं: मेरी प्यारी बहन, आज तो मजा आ गया। मैं तुझे रोज़ चोदा करूंगा....तू
अब से मेरी है...तेरी चूत कितनी टाइट है....सच में मज़ा आ गया....आह...ले
मेरी जान...अपने भाई का लौड़ा.....देख आज मैं बहन चोद बन गया.....

कविता को मैं पूरे ज़ोर शोर से चोदने लगा और साथ में उसके बूब्स भी दबाता
गया। पूरा कमरा हम दोनों भाई बहन की चुदाई के संगीत से गूंज रहा था। हम
दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने अपनी प्यारी बहना को ज़ोर से बाहों में भींच
लिया। उस वक्त हम दो जिस्म और एक जान हो गए थे। हम दोनों बुरी तरह से
हाँफ रहे थे और पसीने से तर बतर हो चुके थे। कविता नें बड़े प्यार से मेरे
माथे पे किस किया और ऊपर से धकेलते हुए बोली: हटो भय्या, मुझे बाथरूम
जाना है। आपने मेरा बुरा हाल कर दिया है।

कविता का एक एक अंग दर्द कर रहा था। वो लड़खड़ाते हुए उठी। मैंने उसे सहारा
दिया और उसे बाथरूम में ले गया। हमने देखा कि बेड की चादर खून से लथपथ हो
गई थी। मेरी बहना का कोमार्य भंग हो चुका था और उसकी सील तोड़ने वाला
भाग्यशाली उसका अपना सगा भाई मैं था।

हम दोनों बाथरूम में शावर के नीचे नंगे नहाने लगे। मैं शरारत से कभी उसके
बूब्स दबा देता तो कभी उसकी चूत में उंगली कर देता। मेरा लन्ड जो सिकुड़
कर छोटा सा हो गया था, फिर से तनने लगा। मेरी बहन ने उसे प्यार से साबुन
लगा कर धोया और फिर उसे मज़े से चूसने लगी। वो मेरा गीला लन्ड अपने नाज़ुक
होंटों पर लिपस्टिक की तरह लगा रही थी। मैंने फिर से अपने लन्ड उसके मुंह
में दे दिया। कविता मेरा लन्ड बड़े प्यार से चूसने लगी। मेरा उत्तेजना से
बदन अकड़ने लगा। मेरा लन्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया और अपनी बहना की चूत
में जाने के लिए मचल उठा। ये देख कर कविता मुस्कुरा उठी। हमारी आँखों ही
आँखों में इशारा हुआ और फिर मैंने अपनी प्यारी गुड़िया सी बहना को गोद में
उठा लिया और बेड पे ले जा कर पटक दिया। मैं कविता के ऊपर चढ़ गया और सीधे
अपना लन्ड उसकी चूत में पेल दिया। एक बार और हमारी धक्कम पेल शुरू हो गई।
कविता पूरे जोश में थी। उसने मुझे नीचे लिटा दिया और मेरे ऊपर सवार हो
गई।

कविता: यू बहन चोद अब मैं आपको चोदूंगी।

मैं: आजा मेरी जान चोद ले अपने भाई को।

कविता: भय्या कोंडोम तो लगा लो।

मैं: जब निकालने वाला होगा, तब लगा लूँगा।

मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और कविता नें मेरी जीभ अपने मुंह में ले ली।
वो मेरी जीभ चूसने लगी और एक हाथ से उसने मेरा लन्ड अपनी चूत में डाल
लिया। मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स दबा रहे थे। बार बार उसकी जुल्फें सामने
आ जातीं जिन्हें मैं बड़े प्यार से पीछे करता गया। इसे देख कर कविता नें
अपने बालों का जूड़ा बना लिया और मज़े से मेरे साथ काम क्रीडा करने लगी।
वासना से उसका मुंह लाल हो गया था। एक भूखी कामुक लड़की की तरह कविता ने
एक सिसकारी भरी और देखते देखते मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में समा गया। अब
कविता मेरे ऊपर उछलने लगी और मेरा लन्ड उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा।
मैं कविता के दोनों गुलाबी निप्पल मसल रहा था। हम दोनों भाई बहन मज़े से
चुदाई का आनंद लेने लगे। जब मैं झड़ने के करीब पहुंचा तो मैंने कोंडोम लगा
लिया। मैं अपने दोनों हाथ पीछे ले गया और उसके चूतड़ दबाने लगा जिससे
कविता और उत्तेजित हो गई। कुछ ही देर में हम दोनों भाई बहन एक साथ झड़ कर
शांत हो गए और काफी देर तक एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे। फिर मैंने अपनी
बहना की डोग्गी स्टाईल में गांड भी मारी। रात भर चुदाई का मज़ा लेने के
बाद सुबह के चार बजे हम दोनों भाई बहन थक कर नंगे एक दूसरे से चिपक कर सो
गए।






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