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Saturday, March 14, 2015

FUN-MAZA-MASTI माँ बेटे की अगन --6

 FUN-MAZA-MASTI

 माँ बेटे की अगन --6

 सुबह सरला बिस्तर पर नही थी वो विजय के बापू के पास थी दो दीन गुजर गये उस रात बिस्तर मे विजय सरला के पास आया उसका तना हुआ गन्ना साडी मे सरला के पपिते जैसे मोटे चुत्तरो के बीच चुभने लगा सरला की कच्ची निंद तुट गई
सरला- विजय ये तु क्या कर रहा है छोड मुझे
विजय- प्यार कर रहां हू मेरी प्यारी मां को
सरला- विजय बेटा ये वक्त नही है ईन बातों का घर पे तेरे बापू बिमार पडे है और तुझे ये सब करने का सुझ रहा है छी छी छोड मुझे
विजय- बापू के बारे मे मुझे भी बुरा लग रहा है मां, पर कब तक तु चिंता मे लगी रहेगी, आज रात मुझे तेरी जरूरत है ।
सरला- विजय वो मेरे पती है
विजय- तो ये गले का मंगलसूञ, भुल गई में तेरा कौन हूं। आज तेरे ईस पती की तुझे सेवा करनी है , बापू की चिंता छोड दे तेरा नया पती तेरा साथ बीस्तर पर लेटा है।
सरला कुछ न बोली विजय सरला को बाहों मे लपेटने लगा
विजय उसके उपर चढ गया उसने सरला बाल खींच दिये और सरला के होट विजय के सामने आये। सरला के होंठ थरथराने लगे। विजय अपना आपा खो बैठा । उसने सरला को जखड लिया।
उसने उसके होंठ सरला के कांपते गरम होठो से भीडा दीये । दो दीन से शान्त पडी सरला के बदन की अगन फीर भड़क उठी । विजय के हाथ सरला के स्तनों को मसल रहे थे। उसने एक-एक करके ब्लाऊज के हुक खोल दीये सरला के दोनो टरबूज जैसे स्तन खुली हवा मे आझाद हो गये दोनो चुचियों के काले अंगूर दो तरफ मुह कीये थे मानो जैसे विजय से नाराज हो दो दीन मिलने ना आये हो ईस लिए । विजय की अगन बढने लगी।
विजय सिर्फ लूंगी मे था उसने झट से लूंगी उतार डाली और नंगा हो गया। उसका मोटा और तगड़ा लण्ड सरला की चूत पर निशाना कीये तना था । विजय ने अब सरला का ब्लाऊज उतार डाला और सरला की साडी की गाठ खोल कर अलग कर दी । पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और पेटीकोट निकाल दीया । हमेशा की तरह सरला की चुत अंदर नंगी थी। उसका गन्ने जैसा लण्ड गरम लोहा हए
सीधा खड़ा तन्ना रहा था।
सरला बदन के प्यास के मारे अपने होंट काट रही थी वो चिल्ला-चिल्ला कर कहना चाहती थी विजय बेटा मुझे चोद पर हालात के मारे मजबूर थी । दोनो का पसीना पानी की तरह
बह रहा था।
सरला का नंगा जिस्म विजय की बाहों में कैद था । होंट से होंट और विजय के पहाडी छाती से सरला के मोटे मुलायम नरम स्तन चिपके हुए थे । दोनो के बदन मिलन की मांग कर रहे थे। दोनो जिस्म अब बदन की आग में जल रहे थे। विजय ने सरला की टांगे फैलाई । सरला की चूत के होंट खुल गये थे....। विजय लंड सरला की खुली हुई दरार और चुत के चिरे पर रगडने लगा ।सरला की चूत गीली हो चुकी थी।
सरला- आहहहह हा हहहहह ममममम
विजय- उमममम हह रानी मुझे पता है तू बडी प्यासी है पर तू मजबूरी में कह नही सकती पर में हूं ना मैने तुझे सच्चा प्यार कीया है। बस तू अब मुझे अपना सब कुछ मान ले । भुल जा तेरा अतित । मै तुझे मेरी रानी बनाके रखूंगा।
सरला आंखे बंद कीये कुछ नही बोली बस बेबसी मे आंसू बहाने लगी
विजय ने सरला की बांहे फैलाई और उसकी हथेली अपनी हथेली मै कैद करली और खड़ा लण्ड चुत की दरार में घुस पड़ा, गरम मोटे और लम्बे लण्ड का अहसास सरला को चुत मे होने
लगा। विजय झटके लगाने लगा
सरला- आह आह हहहहह ममममममां ममममां आ आ सससससस आ आ उमुहहह
विजय- हहह आहहह हहहह
सरला को दर्द हो रहा था पर बाहर आवाज ना जाए ईस लिये वो अपना मुंह दबाये झटके सह रही थी ।
कुछ ही समय में विजय का लम्बा लण्ड चुत में पूरा जड़ तक जाने लगा था।



विजय- मजा ले जान रो मत तुने आजतक मेरी बदन की प्यास बुझाई है में तेरी आगे की जिंन्दगी मे खुशीया

भर दुंगा, मै तुझे शहर ले जाउंगा वहां हम पती-पत्नी की जिन्दगी जियेंगे । अब तो हस दे मेरी जान ।

सरला कुछ देर बाद मुस्कुराई और उसने विजय के होंट पे होंट टीकाए और चुमने लगी ।

शायद वो भी विजय की रखेल बनके जीना नही चाहती थी वो फीर एक सुहागन की जिन्दगी जीना चाहती थी ।

विजय आनन्द से भर उठा । .... उसके धक्के तेजी पकड़ने लगे। सरला मदहोश होती जा रही थी।

विजय कमर उठा कर वो सरला की चुत को सटासट पेल रहा था। अचानक ईस घमासान चुदाई मे

तड-तड कर सरला की चुडीयां तुटने लगी और बीखरने लगी

दोनो जिस्म वासना में लिपटे हुए थे ।

विजय के झटके सरला को चरम सीमा पर ले जा रहे थे....

सरला की चूत विजय के लण्ड को गहराई तक ले रही थी....गहरी चुदाई से उसकी चुत अन्दर तनी जा रही थी ।

विजय भी अब चरम सीमा पर पहुंचने लगा था। उसके धक्के बढ़ गए.... सरला का जिस्म भी अब उत्तेजना की

सीमा को पार करने लगा। सरला चूतड़ उछल उछल कर उसका साथ बराबरी से दे रही थी। सरलाने साडी मुंह मे

भर ली थी और चिल्ला रही थी । उसके धक्के बेतहाशा तेज होते गये ।

सरला झड़ने लगी.... उसके धक्के चलते रहे और वो झड़ती रही ।

विजय- आह्ह्ह्ह् आ.... मां निकला रे मेरा....

विजय अकड गया और उसके लण्ड ने अपनी पिचकारी छोड़ दी। अपना पूरा जोर लगा कर उसने सरला की चूत

को अपना रस भरने लगा। और विजय निढाल हो कर सरला के ऊपर ही लेट गया। और उसके होट चुमने लगा

सरला तो बेहोश ही पडी थी ।

फिर विजय सरला से लिपट कर ही सो गया।

दोनो की आंख लग गई और फीर सुबह हो गई नये दीन की नई सुबह कुछ नया मोड सरला के जीवन मे ले आई

थी।


खिडकी से आती पहली कीरन से सरला की निंद तूटी विजय का पैर सरला की गुदाज नंगी जांघो पे था और हाथ

उसके एक चुची को थामे था । सरला यह देख मुस्कुराई

सरला- पगला कही का रात तो रात निंद मे भी मुझपर अपना हक जता रहा है । कीतना प्यार करता है मुझे

सरला विजय के माथे पर चुमती हुई नंगी खडी हूई उसने साडी बदन से लपेट ली और कमरे से बाहर लडखडाती

निकल पडी । सरला नहा के विजय के बापू के कमरे मे आई उसे अजीब लगा पास जाके देखा तो उनकी सासें

बंद थी सरला ना रोई ना उदास हुई कल रात के बाद वो इस सब के लिए मानसिक रूप से तैयार थी । वो विजय

के कमरे मे गई और उसे उठाने लगी

सरला- विजय बेटा, विजय बेटा उठ

विजय जाग गया

विजय- हमममम क्या है

सरला को सामने देख वो उसे बदन पे खिंचने लगा उसे चुमने लगा ।

सरला- अ अ अ ये सब बादमे बेटा तेरे बापू की सासें नही नही चल रही है रे ।

यह सुनकर वो उठ खडा हुआ उसने कपडे पहन लिए ।

और देखने लगा उसके बापू का देहांत हो चुका था । गांव के लोगो मे खबर फैल गई लोग इकठ्ठा हुए । पतीव्रता

सरला दीखावे आंसू बहा रही थी शायद क्युंकी उसे नया चाहने वाला मिल चुका था।

दोपहर तक सारी विधीया पुरी कीये विजय घर लौटा नहाया और घर मे दोनो आझाद पंछी थे वो सरला के आंसू

बहाये सुजी आंखे जब टावल मे उसके सामने खडे विजय से मिली तो वो शरमा गई ।

उसने सरला को बाहों मे भर लिया और चुमने लगा

विजय- हुममम तो आखिर तू मेरी हो ही गई।

सरला विजय के आंखों मे देखती हुई

सरला- विजय बेटा तु मुझे इतना क्यू चाहता है । मुझमे एसा क्या है रे ।

विजय- तू परी है मां , पता है मै तुझे अपनी जवानी से चाहता हूं । बापू के बाहों मे जब भी देखता मुझे जलन

होने लगती थी ।

सरला- चल बदमाश अपनी मां पे डोरे डालता था।

विजय- चलो मैने तो मेरा सीक्रेट बता दीये अब तेरी बारी

सरला- नही नही मुझे नही बताना वो बडा दुखद अतित है मेरा।

विजय- तो मेरे साथ नही बाटेगी तेरा दुख

सरला- वो बात ये है बेटा मै तब सोलाह साल की थी तब एक दीन स्कूल से आते समय गांव के एक लडके ने

मेरे उपर बलात्कार कीया था, पुरे गांव मे यह बात हवा की तरह फैल गई , मेरी तो जिंदगी ही जैसे नरक बन

गई, पर कुछ साल बाद तेरे बापू ने मुझसे मेरे बारे मे यह हकीकत जानते हुए भी शादी की ईसलिए तेरे बापू मेरे

जिंदगी मे इतने अहम है।

विजय- ओह तो ये बात है । कसम से मां अगर वो आदमी आज मुझे मील जाए ना तो उसका लंड काट डालूंगा

, और बापू के तो जितने अहसान मानू कम है अगर वो तुझसे शादी ना करते तो आज मुझे इतनी सुंदर मां और

बीवी ना मिलती और अपनी मां के साथ ईलू-ईलू और मां के जवानी के मजे ना मिलते। थैक्यू बापू , आप की

इस अमानत को मै हमेशा खुश रखूंगा ।

सरला- चल हट बेशरम कहीका

विजय- तेरे लिए तो मैने सारी शरम छोड दी है बस अब तेरी सारी शरम दूर करनी है।

सरला- तू बडा गरम है रे शहर मे जरूर कोई ना कोई होगी तेरी गरमी दूर करने वाली है ना।

विजय- तेरी कसम कोई नही है पर अब होगी रोज रात मेरी गरमी दूर करने वाली ।

सरला – अच्छा वो भला कौन

विजय- देखो तो पुछ एसे रही है जैसे कुछ पता ही नही की मेरा इशारा कीसकी ओर है।

सरला शरम के मारे लाल हो गई पर वो विजय के मन की बात परखने नाटक करने लगी





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