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Thursday, October 30, 2014

FUN-MAZA-MASTI होली का असली मजा--26

FUN-MAZA-MASTI

 होली का असली मजा--26

नहीं , नहीं , उईइइइइइइइइइइइइइइ ,.... लगता है




छुटकी के होंठों पर वो साथ साथ , अपनी मजे लूटी बुर रगड़ रही थीं।

 किसी तरह वो बोली , : भौजी , झड़ने दो न ,,,,बस , बस करो ना।

लेकिन ननदों को तड़पाने में रीतू भाभी का जवाब नहीं था। उन्होंने पूरी ताकत से दोनों हाथो से उसकी कसी चूत को फैलाया , और लगीं , हचक हचक कर जीभ से चूत चोदने।

छुटकी तड़प रही थी , चूतड़ पटक रही थी।


लेकिन रीतू भाभी , सिर्फ ननद को नहीं नंदोई को भीतड़पा रही थीं।

एक हाथ से उन्होंने उनके शार्ट को कबका उतार के दूर फ़ेंक दिया था।


और जोर जोर से लंड मुठिया रही थीं , खुला सुपाड़ा पागल हो रहा था।


 मैं भी छुटकी के मुंह के पास बैठी थीं।

और अब जब छुटकी रिरयाने लगी , भाभी प्लीज कुछ करो न


तो रीतू भाभी हंस के बोली , " अरे जीजू का इतना मोटा मुस्टंडा लंड है और साली झड़ने के लिए तड़प रही है। ले लो न जीजू का लंड। "



उन्होंने मुझे कुछ इशारा किया , और छुटकी की फैली चूत में इनका सुपाड़ा सटा दिया।

मैं भी भाभी का इशारा समझ गयी थी , छुटकी का प्यार से सर सहलाते हुए उसका मुंह खुलवाया और अपनी मोटी , बड़ी बड़ी चूंची अंदर ठेल दी।



 वो गों गों करती रही। लेकिन मैं उसका पूरा मुंह भर कर के ही मानी , और साथ में उसकी दोनों कलाइयों को भी पकड़ लिया।


रीतू भाभी , छुटकी की गीली पनियाई चूत को एक हाथ से फैला रही थीं और दूसरे हाथ से नंदोई के मस्त मोटे लंड को अंदर घुसेड़ रही थी साथ में ललकार रहीथी ,

" पेल दो साले , साल्ली की फुद्दी में , फाड़ दो रज्जा इसकी चूत "

और वो भी दोनों हाथ से उसकी पतली कमर पकडे हुए थे और उन्होंने करारा धक्का मारा , आधा सुपाड़ा अंदर।




हाथ मेरे कब्जे में थे और उसकी मुंह में मेरी मोटी चूंची घुसी हुयी थी।

बिचारी गों गों करती रही , दर्द से बिलबिलाती रही।
लेकिन ऐसे मौके पे वो दया माया दिखाने वालो में से नहीं थे।



और दिखानी चाहिए भी नहीं

(ये बात मुझसे बढ़कर कौन जानता था )



बल्कि उससे उनका जोश और बढ़ जाता था।

और यहाँ आग में घी डालने वाली , उनका जोश बढ़ाने वाली , रीतू भाभी भी थीं।

अगला धक्का उन्होंने दूने जोर से मारा।

मेरे लाख जोर से पकड़ने के बावजूद उसकी एक कलाई छूट ही गयी , इतनी जोर से छटपटा रही थी वो।

पानी के बाहर मछली की तरह तड़प रही थी, बिचारी छुटकी।

मैंने पूरी ताकत से अपनी चूची उस के मुंह में पेल रखी थी।

तब भी उस के होंठों से चीखें , गों गों की आवाज आ रही थी , वो जोर जोर से अपने चूतड़ पटक रही थी।

उनका मोटा पहाड़ी आलू ऐसा सुपाड़ा अभी भी पूरा अंदर नहीं घुसा था। आलमोस्ट ३/४ अंदर पैबस्त होगया था , बाकी बाहर था।

रीतू भाभी ने ललकारा उन्हें , "अरे नंदोई जी जरा जोर से धक्का मारो , कमर की सारी ताकत , क्या अपने बहनो के साथ पूरी खर्च कर के आये हो। कच्ची कली की चूत है कोई ,मेरी नंनद की ,.... "

रीतू भाभी की अधूरी रह गयी।

उन्होंने छुटकी की कमर एक बार फिर जोर से पकड़ी और , हल्का सा लंड पीछे खींच के पूरे जोर से धक्का मारा।


छुटकी की गों गों की आवाज गूँज रही थी। उस के आँखों से शबनम उतर कर उसके गोरे गुलाबी गालों को गीला कर रही थी। दर्द से उसका पूरा चेहरा डूबा था।





और अब उनका मोटा सुपाड़ा पूरी तरह अंदर पैबस्त हो चूका था।

छुटकी की कच्ची कसी चूत ने उसे कस के दबोच रखा था , जैसे कब के बिछुड़े बालम मिले हों।

लेकिन पिक्चर अभी काफी बाकी थी।

रीतू भाभी ने मुझे इशारा किया की मैं उसके हाथ छोड़ दूँ और चूंची उसके मुंह से निकाल लूँ।

और मैंने वैसा ही किया।

मैं उनका प्लान पूरी तरह समझ रही थी , अब छुटकी लाख चूतड़ पटके , ये मोटा सुपाड़ा टस्स से मस्स नहीं होने वाला था।


अब बिचारी बिना चुदे नहीं बच सकती थी।

छुटकी हलकी हलकी कराह रही थी , लेकिन अब उसकी कुँवारी किशोर चूत को मोटे सुपाड़े की आदत सी पड़ गयी थी।

और ये भी उसकी चूत छोड़ के उसके कच्चे टिकोरों के पीछे पड़ गए थे।


थोड़ी देर तक उसे सहलाते रहे , दबाते रहे मसलते रहे ,फिर होंठों के बीच ले कर हलके हलके उन खटमिठवा कच्ची अमियों का स्वाद लेने लगे। कभी निपल को फ्लिक करते और अचानक उन्होंने उसके बस आते उभरते , निपल्स को काट लिया।
 

चीख निकल गयी छुटकी की।

रीतू भाभी कुछ उनके कान में फुसफुसा रही थीं , और उन्होंने छुटकी की टांगो को दुहरा कर दिया। उनका एक हाथ अब उसके नितम्ब पे था और एक कमर पे। छुटकी की टाँगे , उनके कंधे पे फँसी थी।


उन्होंने थोड़ा लंड बाहर खींचा , छुटकी ने राहत की सांस ली , लेकिन उस बिचारी को क्या मालूम था असली हमला अभी बाकी था।

और फिर पूरी ताकत से खूब हचक के , जोर से पेल दिया।

खूब जोर से चीख निकली , ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जान गईइइइइइइइइइइइइइइइ।

झिल्ली फट चुकी थी।

खून की दोचार बूंदे बाहर चुहचुहा उठी थीं।


 
लेकिन अभी रुकने का समय नहीं था , दूसरा , तीसरा , चौथा , एक के बाद एक धक्का , वो मारते गए।

वो तड़पती रही , चीखती रही , चिल्लाती रही।

ओह्ह्ह्ह्ह नहीं जीजू रुक जाओ.

आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जान गईइइइइइइइइइइइइ , दीदीइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ ओह्ह्ह्ह्ह छोडो आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

लेकिन उनका बीयर कैन ऐसा मोटा लंड आधे से भी ज्यादा अब धंसा था।




जैसे कोई घुड़सवार , किसी बाँकी भागती , हिरणी का पीछा करे और उसे अपने भाले से बींध दे ,और हिरणी लथपथ गिर पड़े , बार बार अपनी गर्दन मोड़ कर अपने शिकारी की ओर देखे , बस वही हालत छुटकी की थी।

थकी , निढाल, दर्द से डूबी और पूरी तरह फैली जांघो के बीच , खून खच्चर ,…

एक बार तो मैं सहम गयी , लेकिन रीतू भाभी ने मुझे आँख मार के इशारा किया , अरे कच्ची कली की चूत फटी है , वो भी मूसल ऐसे लंड से। ये तो होना ही था। अब नदी पार हो गयी है , घबड़ाना मत।

और सच में , उन्होंने भी अब और चोदना छोड़ कर , छुटकी के प्यारे प्यारे गालों को चूमना शुरू किया , उसके होंठों को अपने होंठो के बीच ले कर चूसने लगे , एक हाथ छुटकी की छोटी छोटी चूंची , दबा सहला रहा था तो दूसरा हाथ उसका सर हलके सहला रहा था।

५-७ मिनट के बाद , उसने आँख खोल दी और टुकुर टुकुर अपने जीजा की ओर देख के हलके से मुस्कराया।

फिर उसने मुझे और रीतू भाभी को देखा और , हलके से उसकी आँखों में ख़ुशी नाच रही थी।


मेरी और रीतू भाभी की आँखों ने हाई फाइव किया।


उन्होंने प्यार से उसके होंठों के बीच अपनी जीभ पेल दी , और लगे उसका मुंह चोदने।

वो भी जैसे लंड चूस रही हो , उनकी जीभ चूस रही थी।

अब बारी थी गीयर बदलने की ,

लेकिन वो भी , हम से ज्यादा उन्हें अपनी साली की चिंता थी।

वो सिर्फ आधे लंड से छुटकी की चूत चोदने लगे , वो भी बहुत हलके।

दर्द उसे अभी भी हो रहा था , लेकिन मजा भी आ रहा था ,

कभी दर्द से कराहती तो कभी मजे से सिसकती।





लेकिन ये आधे लंड की चुदायी , न तो रीतू भौजी को कबूल थी न मुझे।

बांस ऐसे लंड वाले जीजा का क्या फायदा अगर साल्ली , आधे तीहे लंड से चुदे।

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